इस्लामाबाद, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने और इंटरनेट सेवाओं पर बैन की खबरों पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने संघीय सरकार की ओर से लगाए गए आपातकाल के दौरान प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके अनुपात पर भी सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को प्रांत में आपातकाल घोषित करते हुए गवर्नर शासन लागू कर दिया था। इस फैसले के बाद जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल, दक्षिण एशिया के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने आपातकाल की घोषणा और प्रांत में सशस्त्र बलों की तैनाती की निंदा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं की मनमानी हिरासत और पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवाओं में बाधा की खबरें इन आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।”
उन्होंने कहा, “कुछ बेहद सीमित परिस्थितियों में, जब कोई सार्वजनिक आपात स्थिति देश के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाती है, तब सरकारें अपने मानवाधिकार संबंधी दायित्वों से अस्थायी रूप से हटने के उपाय कर सकती हैं। हालांकि, आपातकालीन शक्तियां मानवाधिकारों के दमन, असहमति की आवाज दबाने या सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार नहीं देतीं।”
पंत ने चेतावनी दी कि सेना की तैनाती से खैबर पख्तूनख्वा का और अधिक सैन्यीकरण होने तथा बल के गैरकानूनी इस्तेमाल की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के मामलों में सशस्त्र बलों के पुराने रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया।
उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए सैन्यकर्मियों का इस्तेमाल न करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सैन्य बल जवाबदेह बने रहें तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और मानकों का पालन करें।
पंत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर संघीय अधिकारियों को आपातकाल के तहत की जाने वाली सभी कार्रवाइयों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक आपातकालीन उपाय परिस्थितियों के लिहाज से हों।
स्थानीय मीडिया ने सोमवार को खबर दी कि प्रांतीय सरकार निलंबित किए जाने के बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने मीडिया से कहा कि नेताओं के खिलाफ लंबित कानूनी मामलों में आरोप तय किए जाएंगे और मुकदमा चलाया जाएगा।
इस बीच, आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत में राजनीतिक तनाव और सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच गवर्नर हाउस में आग लगा दी गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में गवर्नर हाउस आग की लपटों में घिरा दिखाई दिया। अन्य वीडियो में प्रांत के विभिन्न शहरों में पुलिस की ओर से गोलीबारी और आंसू गैस के गोले दागे जाने के दृश्य सामने आए।
इससे पहले रविवार को विपक्षी दलों ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया था। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कानूनी और जन आंदोलन के माध्यम से चुनौती देने की बात कही।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, पाकिस्तान-तहरीक-ए-पाकिस्तान (पीटीआई) ने एक बयान में चेतावनी दी कि यह फैसला एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। पार्टी ने इसे प्रांत के निर्वाचित नेतृत्व को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई राजनीतिक प्रताड़ना बताया।
