चंडीगढ़, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने गुरुवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को पद से हटाने की मांग की। पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 की नामांकन प्रक्रिया और उसके बाद हुए नगर निकाय चुनावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
एसएडी नेता दलजीत सिंह चीमा ने यह भी मांग की कि उन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, जिन्होंने कथित तौर पर नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की मदद की और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त तथ्य जांच आयोग (जिसकी अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस निर्मलजीत कौर ने की थी) ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि विपक्षी उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई, उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया, नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया और फर्जी मतदान जैसी घटनाएं सामने आईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी ने चुनाव के दौरान प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के कथित दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों को नजरअंदाज किया।
चीमा ने कहा, “अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि राज्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में जमीनी स्तर के लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।”
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर पटियाला के 28 वार्डों, बाघापुराना के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट के 7 वार्डों में पुनर्मतदान की प्रक्रिया की निगरानी करवाने का फैसला इस बात का संकेत है कि अदालत को राज्य चुनाव आयोग की निष्पक्ष चुनाव कराने की क्षमता पर भरोसा नहीं है।
इस दौरान चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पराली जलाने के आरोप में किसानों के खिलाफ दर्ज किए जा रहे मामलों को लेकर भी निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और उन्हें पराली प्रबंधन के लिए 1,500 रुपए प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी।
चीमा ने आरोप लगाया कि अब ड्रोन के जरिए पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी की जा रही है और किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि किसान जानना चाहते हैं कि 1,500 रुपए प्रति एकड़ सहायता को लेकर कोई सरकारी अधिसूचना जारी हुई है या नहीं और यह राशि कब जारी की जाएगी।
अकाली दल नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों को न तो पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध करा सकी है और न ही कोई आर्थिक सहायता दे पाई है।
