जिनेवा, 11 सितंबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने शुक्रवार को बताया कि यमन में पिछले सप्ताह संघर्ष तेज होने के बाद अब तक कम से कम 46,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि विस्थापित लोगों की संख्या हर घंटे बढ़ रही है।
आईओएम के अनुसार, संघर्ष की तीव्रता बढ़ने से हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। संगठन ने मानवीय संकट गहराने की आशंका जताते हुए प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
आईओएम की महानिदेशक एमी पोप ने कहा, “इस संघर्ष में कई परिवार दूसरी या तीसरी बार अपना घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और उनके पास अब लगभग कुछ भी नहीं बचा है।”
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लड़ाई नए इलाकों में फैल रही है, जरूरतमंद लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाना और कठिन होता जा रहा है। उन्होंने सुरक्षित और निर्बाध मानवीय पहुंच की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
पोप ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की कि वे मानवीय सहायता एजेंसियों को सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करें तथा नागरिकों, राहतकर्मियों और राहत सामग्री की सुरक्षा करें।
आईओएम के अनुसार, हाल के दिनों में पश्चिमी तटीय क्षेत्र और ताइज प्रांत में बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। गुरुवार रात बड़ी संख्या में लोगों को अपना सामान लेकर मोखा शहर से निकलते देखा गया।
संगठन की डिस्प्लेसमेंट ट्रैकिंग मैट्रिक्स (डीटीएम) टीम प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन कर रही है, ताकि मानवीय सहायता कार्यों के लिए अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकें। हालांकि दूरसंचार सेवाओं में व्यापक व्यवधान के कारण प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नई जानकारी के अनुसार विस्थापित लोग लहज और अदन प्रांतों में पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ लोग उत्तर की ओर इब्ब प्रांत की तरफ भी जा रहे हैं।
रिपोर्टों में बताया गया है कि मकबनाह, जबल हबाशी और अल-मआफेर क्षेत्रों के कई गांव लगभग खाली हो गए हैं, क्योंकि संघर्ष आबादी वाले क्षेत्रों के और करीब पहुंच गया है। इसके अलावा, राहत और आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गमोखा-ताइज सड़क बंद हो गई है। इससे स्थानीय समुदायों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
यमन में संघर्ष वर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया।
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिमी तट पर हालिया सैन्य बढ़त यमन के युद्धक्षेत्र में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। यह वृद्धि वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सबसे गंभीर तनावों में से एक है, जिसने लंबे समय तक बड़े स्तर की लड़ाई को काफी हद तक रोक रखा था।
