चेन्नई, 29 सितंबर (आईएएनएस)। द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (डीएमके) ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष जांच दल (एसआईटी) को निर्देश देने की मांग की है कि वह आर. वीरमणि बाल यौन शोषण मामले की जांच के दौरान यह भी पता लगाए कि क्या मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों के पास अपने उस दावे के समर्थन में कोई सबूत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार ने आरोपी को संरक्षण दिया था।
पार्टी कोषाध्यक्ष टीआर बालू की ओर से दायर याचिका में डीएमके ने कोर्ट से मांग की है कि वह पूरी तरह महिलाओं वाली एसआईटी को 27 सितंबर को दी गई उनकी अर्जी पर कार्रवाई करने का निर्देश दे। इस अर्जी में मुख्यमंत्री विजय और मंत्रियों आधव अर्जुन और सीटीआर निर्मल कुमार को पूछताछ के लिए बुलाने की मांग की गई थी।
जेम ग्रेनाइट्स के फाउंडर वीरमणी, ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज’ (पॉक्सो) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में मुख्य आरोपी हैं। इस मामले की जांच के लिए खास तौर पर एसआईटी बनाई गई थी।
एक हलफनामे में बालू ने कहा कि मुख्यमंत्री और दो मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से पिछली डीएमके सरकार पर वीरमणि को बचाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास उन आरोपों को साबित करने वाली जानकारी थी, तो उनका फर्ज था कि वे उसे जांच करने वालों के साथ शेयर करते।
बालू ने तर्क दिया कि पॉक्सो मामले से जुड़ी जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति को वह जानकारी जांच एजेंसी के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी छिपाना अपराध को छिपाने के बराबर हो सकता है। एसआईटी को उन तीनों नेताओं को बुलाना चाहिए और उनके पास मौजूद कोई भी ऐसी सामग्री लेनी चाहिए जो जांच में मदद कर सके।
याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि एसआईटी, डीएमके के पक्ष पर विचार करे और यह तय करे कि क्या सार्वजनिक बयान उन लोगों के पास मौजूद सबूतों पर आधारित थे, जिन्होंने वे बयान दिए थे। इसमें कोर्ट से पिछली सरकार पर लगे आरोपों की सच्चाई तय करने के लिए नहीं कहा गया है।
टीआर बालू ने कहा कि इस शिकायत या ज्ञापन की एक कॉपी डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और पुलिस फोर्स के प्रमुख को भी भेजी गई थी। पार्टी ने जांच करने वालों से कहा था कि वे नेताओं के बयानों के पीछे की जानकारी का स्रोत पता लगाएं।
इस ज्ञापन में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या उन तीनों में से किसी ने जांच से जुड़ी ऐसी कोई जानकारी या सामग्री हासिल की है, जो उन्हें कायदे से नहीं मिलनी चाहिए थी। टीआर बालू ने कहा कि इन सवालों की जांच एसआईटी को करनी चाहिए, न कि इस मामले पर सार्वजनिक बहस के लिए छोड़ देना चाहिए।
डीएमके की याचिका जांच से जुड़े राजनीतिक दावों को हाई कोर्ट के सामने रखती है, जबकि एसआईटी वीरमणि के खिलाफ आरोपों की जांच जारी रखे हुए है। याचिका में नेताओं की जानकारी और किसी भी सहायक सामग्री की जांच की मांग की गई है।
