Sunday, July 12, 2026
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‘डीएमके और एआईएडीएमके की राजनीतिक ताकत हो रही कम’, तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार का दावा

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कोयंबटूर, 8 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने बुधवार को डीएमके और एआईएडीएमके पर निशाना साधते हुए दावा किया कि दोनों पार्टियां तेजी से अपनी राजनीतिक ताकत खो रही हैं और जल्द ही उनके पास कार्यकर्ता भी नहीं बचेंगे।

उन्होंने विपक्ष पर मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे को रोकने की कोशिश करने और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर सरकार की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया।

मीडिया से बातचीत के दौरान निर्मल कुमार ने सवाल उठाया कि डीएमके मुख्यमंत्री के प्रस्तावित करूर दौरे को लेकर इतनी चिंतित क्यों है। करूर में मंदिर सुरक्षा गार्ड अजित कुमार की कथित हिरासत में मौत के मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार को एक ज्ञापन दिया गया था। निर्मल कुमार का आरोप है कि विपक्ष का असली मकसद मुख्यमंत्री को करूर जाने से रोकना है।

मंत्री ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री का दौरा इतना महत्वपूर्ण नहीं है तो फिर उन्हें करूर जाने से रोकने की लगातार कोशिशें क्यों की जा रही हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष लगातार याचिकाएं दायर कर रहा है। अगर उन्हें अपने पक्ष पर इतना भरोसा है तो फिर मुख्यमंत्री के दौरे से उन्हें चिंता क्यों हो रही है?”

निर्मल कुमार ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच पहले से जारी है और जांच एजेंसी ने अभी तक इस मामले में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं किया है।

उनके अनुसार, विपक्ष इस जांच का राजनीतिक लाभ उठाने और सत्तारूढ़ सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, “पिछले एक सप्ताह से वे इस मामले का इस्तेमाल कर हमारी पार्टी और हमारे मुख्यमंत्री की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी हर कोशिश नाकाम रही है।”

मंत्री ने आरोप लगाया कि यही राजनीतिक दल पहले सीबीआई जांच की आवश्यकता पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन अब वे इसी मुद्दे पर नई याचिकाएं लेकर अदालतों का रुख कर रहे हैं।

निर्मल कुमार ने दावा किया कि डीएमके और एआईएडीएमके सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ अपने सभी राजनीतिक हथकंडे आजमा चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है।

उन्होंने कहा, “डीएमके और एआईएडीएमके के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। दोनों पार्टियां लगातार कमजोर हो रही हैं। वह दिन दूर नहीं है, जब इन दोनों दलों में मुश्किल से कोई कार्यकर्ता बचेगा।”

बता दें कि करूर हिरासत मौत मामले को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ टीवीके सरकार और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।