शिमला, 8 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसके लिए पुलिस ने ‘नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों में अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम, 1988’ के प्रावधानों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।
पुलिस ने शुक्रवार को पूरे राज्य में की गई एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में अवैध नशीले पदार्थों के व्यापार विशेष रूप से ‘चिट्टा’ और हेरोइन में शामिल आदतन तस्करों के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी से 19 निवारक हिरासत आदेश सफलतापूर्वक प्राप्त किए और उन्हें लागू किया।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति ऐसे अपराधी हैं, जो बार-बार अपराध करते हैं और संगठित गिरोहों से जुड़े हैं। ये लोग लगातार अवैध तस्करी की गतिविधियों में लिप्त थे और समाज के लिए विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए गंभीर खतरा बने हुए थे।
ये कार्रवाइयां हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा अपनाई जा रही एक केंद्रित निवारक पुलिसिंग रणनीति का हिस्सा हैं। इस रणनीति के तहत, लगातार निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाना, पीछे के संपर्कों की जांच और सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण को व्यवस्थित रूप से ‘नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों में अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम’ के तहत हिरासत के मजबूत प्रस्तावों में बदला जा रहा है।
इसका उद्देश्य न केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना है, बल्कि बड़े तस्करों को निष्क्रिय करना और राज्य में सक्रिय नशीले पदार्थों की आपूर्ति के बड़े नेटवर्क को तोड़ना भी है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अपनी सख्त ‘जीरो टॉजरेंस’ नीति को दोहराया है।
जिन लोगों के खिलाफ पहले आपराधिक कार्रवाई की जा चुकी है, फिर भी वे बार-बार नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में लिप्त होते हैं, उनके खिलाफ सख्त निवारक हिरासत उपायों का इस्तेमाल जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने इस अभियान में जनता की सक्रिय भागीदारी को लगातार प्रोत्साहित किया है। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली’ (डायल 112) के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री से संबंधित जानकारी साझा करें। ऐसी सभी जानकारियों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है।

