Thursday, July 2, 2026
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कांगो में इबोला के मामले 1,400 के पार, मरने वालों की संख्या 438 हुई

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किंशासा, 2 जुलाई (आईएएनएस)। कांगो में इबोला संक्रमण का प्रकोप जारी है। अब तक 1,400 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें से 438 लोगों की मौत हो गई। सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कांगो में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 1,406 हो गई है। अब तक 192 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 609 अन्य का इलाज जारी है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया है।

इबोला संक्रमण मुख्य रूप से पूर्वी प्रांतों इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु में फैला हुआ है, जहां निगरानी, ​​मेडिकल देखभाल और बचाव के काम लगातार जारी हैं।

सरकार ने कहा कि वाहनों और एम्बुलेंस की तैनाती, दवाओं और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की आपूर्ति, जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी की कोशिशों के जरिए प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया जा रहा है।

कांगो ने मई के मध्य में इस प्रकोप की घोषणा की थी। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि असुरक्षा, लोगों की आवाजाही, स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव और संपर्क में आए लोगों की पहचान में लापरवाही इस बीमारी पर नियंत्रण के प्रयासों को कठिन बना रही है।

इबोला एक दुर्लभ, गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है। यह वायरस जंगली जानवरों से इंसानों में फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसके लक्षणों में अचानक फ्लू जैसे लक्षण और बुखार आना शामिल है। इससे अंगों का काम करना बंद हो सकता है।

लक्षण आमतौर पर संपर्क में आने के 2 से 21 दिनों के बाद दिखाई देते हैं और इनमें अचानक बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, तेज सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्लीडिंग या शरीर पर निशान पड़ना शामिल है।

मई 2026 में कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप की पुष्टि हुई थी। इसमें शामिल इबोला के ‘बुंडिबुग्यो’ वायरस के लिए कोई वैक्सीन या खास इलाज नहीं है। हालांकि, संभावित वैक्सीन और उपचारों पर परीक्षण जारी हैं।

यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र मानवीय संकट, दूरस्थ और घनी आबादी वाले इलाकों, असुरक्षा और लोगों व व्यापारिक गतिविधियों की अधिक आवाजाही जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।