इंदौर, 13 फरवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इंदौर की 10.15 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।
फेडरल जांच एजेंसी ने कहा कि ईडी के सब-जोनल ऑफिस ने गुरुवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के नियमों के तहत अटैचमेंट का ड्राफ्ट तैयार किया था। ईडी द्वारा अटैच की गई कंपनी की अचल प्रॉपर्टीज मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड जमीन हैं।
ईडी ने एक बयान में कहा, “सीबीआई, एसीबी, भोपाल द्वारा मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के सेक्शन 13(1)(डी) और इंडियन पीनल कोड, 1860 के सेक्शन 420 के साथ 120-बी (जो पीएमएलए के तहत शेड्यूल्ड अपराध हैं) के तहत यूको बैंक, इंदौर के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी करने और 58 करोड़ रुपए से ज्यादा का गलत नुकसान पहुंचाने के लिए दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी।”
जांच एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान यह पता चला कि रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जिसे अब मेसर्स स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) ने अपनी ग्रुप कंपनियों में इन्वेस्टमेंट और अपने एसोसिएट्स और ग्रुप की कंपनियों को लोन और एडवांस देकर बेईमानी से फंड डायवर्ट और साइफन किया।
जांच में यह भी पता चला कि बिना किसी असली अंडरलाइंग ट्रेड के जाली, बनावटी और हेरफेर किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर बेईमानी से क्रेडिट सुविधाएं और लेटर ऑफ क्रेडिट हासिल किए गए थे, और उससे होने वाली कमाई को जानबूझकर डायवर्ट, लेयर्ड और कॉमन ओनरशिप और कंट्रोल के तहत इंटरलिंक्ड एंटिटीज के एक कॉम्प्लेक्स वेब के जरिए बॉरोअर कंपनी को वापस रूट किया गया था।
ईडी के बयान में आगे कहा गया है कि गैर-कानूनी तरीके से साइफन किए गए फंड को सिस्टमैटिकली लेयर्ड किया गया और बाद में अलग-अलग प्रॉपर्टी हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले, ईडी, इंदौर ने दिसंबर, 2025 में इस मामले में सर्च और सीजर ऑपरेशन किया था। ईडी ने यह भी साफ किया कि मामले में आगे की जांच चल रही है।

