नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और उसके प्रमोटरों से जुड़े 34,615 करोड़ रुपए के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 51.75 करोड़ रुपए की बैंक जमा राशि फ्रीज कर दी है। एजेंसी ने कहा कि यह राशि अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से संबंधित है और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान इसका पता चला है।
ईडी द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 19 अगस्त को की गई तलाशी अभियान के बाद की गई। जांच में सामने आया कि ब्रिटेन में स्थित हर्टमोर हाउस नामक संपत्ति, जो कपिल वधावन की पत्नी वनीता वधावन के नाम पर थी, को कथित तौर पर जटिल वित्तीय लेनदेन और कृत्रिम देनदारी खड़ी कर बेच दिया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई और वनीता वधावन के बीच एक कथित ऋण समझौता तैयार किया गया था, जिसके आधार पर ब्रिटेन स्थित संपत्ति को गिरवी रखा गया। ईडी का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी संपत्ति पर कानूनी बोझ दिखाकर डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी से जुड़े देनदारियों का निपटान करना था।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2026 में इस संपत्ति को बेच दिया गया, लेकिन बिक्री से प्राप्त राशि संपत्ति की वास्तविक मालिक वनीता वधावन के खाते में जाने के बजाय अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारत स्थित बैंक खाते में भेजी गई।
एजेंसी का कहना है कि यह लेनदेन अपराध से अर्जित धन को खपाने तथा विदेशी संपत्ति के माध्यम से भारतीय देनदारियों का निपटान करने की एक सुनियोजित प्रक्रिया का हिस्सा था।
तलाशी के दौरान ईडी ने अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते की जांच की, जिसमें लगभग 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 51.75 करोड़ रुपए जमा पाए गए। एजेंसी ने इस राशि को अपराध से अर्जित आय मानते हुए पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज कर दिया। इसके अलावा जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर सामने आया था। यह शिकायत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम की ओर से दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कपिल वधावन, धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने मिलकर कंसोर्टियम बैंकों को धोखा देने की साजिश रची।
सीबीआई के अनुसार, बैंकों के समूह ने डीएचएफएल को कुल 42,871.42 करोड़ रुपए की ऋण सुविधाएं मंजूर की थीं। बाद में आरोपियों ने कंपनी के खातों में कथित हेरफेर कर ऋण राशि का दुरुपयोग और गबन किया, जिससे बैंकों को लगभग 34,615 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और धन के प्रवाह, विदेशी संपत्तियों तथा संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। यह मामला देश के सबसे बड़े बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जाता है।
