Tuesday, May 26, 2026
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केंद्र ने एनआईटी राउरकेला में प्रस्तावित 2 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई पर ओडिशा सरकार से मांगी रिपोर्ट

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भुवनेश्वर, 23 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में एक नई इमारत के निर्माण के लिए 2,000 से अधिक पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव पर ओडिशा वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

आरटीआई और पर्यावरण कार्यकर्ता अलाया सामंतराय की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 20 मार्च को ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा। मंत्रालय ने कहा कि मामले में नियमों के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जाए।

पत्र में कहा गया कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस जगह पर नई बिल्डिंग बनाने की योजना है, वहां घना हरित क्षेत्र है। यह इलाका पर्यावरण के लिए सुरक्षा कवच जैसा काम करता है और स्थानीय पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं का ठिकाना भी है। कैंपस के अंदर एक दूसरी जगह मौजूद है, जहां सिविल इंजीनियरिंग विभाग के लिए पहले ही नींव का काम शुरू हो चुका है और वहां पेड़ भी कम हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ काटने से बचने के लिए उस जगह पर विचार किया जा सकता है।

मंत्रालय ने विभाग से कहा कि वह पूरे मामले की विस्तार से जांच करे और नियमों के मुताबिक जरूरी कदम उठाए। साथ ही क्या कार्रवाई की गई, इसकी रिपोर्ट भी जल्द भेजे।

शिकायतकर्ता सामंतराय ने कहा कि औद्योगिक शहर राउरकेला में हरे-भरे इलाके में फैला एनआईटी राउरकेला सिर्फ कैंपस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे स्टील सिटी के लिए फेफड़ों की तरह काम करता है। उन्होंने कहा कि कैंपस की हरियाली कई तरह के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के लिए स्वर्ग जैसी है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कैंपस में निर्माण कार्यों के लिए पेड़ काटे गए हैं, लेकिन इस बार नई बिल्डिंग के लिए 2,000 से ज्यादा बड़े पेड़ काटने का प्रस्ताव न तो जरूरी है और न ही सही। उनका कहना है कि सिविल इंजीनियरिंग विभाग के लिए पांच एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में रखी गई जमीन पर ही नई इमारतें आसानी से बनाई जा सकती हैं। इसके बावजूद एनआईटी प्रशासन किसी दूसरी जगह पेड़ काटने की योजना बना रहा है।

पर्यावरण कार्यकर्ता ने राउरकेला के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर से भी अपील की है कि दी गई अनुमति पर फिर से विचार किया जाए। साथ ही एनआईटी प्रशासन को भवन योजना दोबारा देखने और ऐसी दूसरी जगह तलाशने को कहा जाए, जहां सबसे कम पेड़ काटने पड़ें।