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कर्नाटक: बल्लारी में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप, भाजपा नेता और चुनाव अधिकारियों पर एफआईआर

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बेंगलुरु, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट से 7,561 नाम हटाने की कोशिश करने के आरोप में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट-1 (बीएलए-1), बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के एक पार्षद और तीन अन्य लोगों के खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज की गई।

यह मामला वार्ड नंबर 23, बूथ नंबर 94 के कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) गौतम की शिकायत पर दर्ज किया गया है। जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद और भाजपा बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर, असिस्टेंट कमिश्नर नंदीश, बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) सुमलता और केस वर्कर शरणबसवा शामिल हैं।

शिकायत के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया 29 जून को शुरू हुई थी और 24 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी। इसके बाद वोटरों को नाम जुड़वाने के लिए दावे पेश करने और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया था।

शिकायत करने वाले का आरोप है कि 21 सितंबर को मोटकर ने बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन इलाके में 7,561 वोटरों के नामों की दोबारा जांच की मांग वाली एक अर्जी स्वीकार की। शिकायत में कहा गया है कि चुनाव अधिकारियों ने पहले इस अर्जी को खारिज कर दिया था और इस बारे में एक पावती भी जारी की थी। इसके बावजूद आरोप है कि मोटकर ने 22 सितंबर को नाम हटाने के लिए ‘फॉर्म-7’ के तहत आवेदन जमा किए।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित चुनाव अधिकारियों ने आपत्तियों के बावजूद वोटरों की दोबारा जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और मोटकर के निर्देशों पर काम किया।

शिकायत के मुताबिक, एसआईआर गाइडलाइंस में एक बीएलए द्वारा ज्यादा से ज्यादा 30 ‘फॉर्म-7’ एप्लीकेशन जमा करने का नियम है। हालांकि, शिकायत करने वाले का आरोप है कि चुनाव अधिकारियों ने वोटरों से जुड़े 7,561 एप्लीकेशन स्वीकार किए और उन पर कार्रवाई की।

शिकायत में एक मुख्य आरोप यह है कि इन एप्लीकेशन में शामिल 7,561 वोटरों में से लगभग 98.08 प्रतिशत वोटर अल्पसंख्यक समुदाय से थे। शिकायत करने वाले का आरोप है कि ये एप्लीकेशन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के मकसद से जमा किए गए थे।

यह भी आरोप लगाया गया है कि एप्लीकेशन जमा करने और उन पर कार्रवाई करने में मोटकर और चुनाव अधिकारियों के बीच मिलीभगत थी,जिनमें असिस्टेंट कमिश्नर नंदीश, बीएलओ सुमालथा और केस वर्कर शरणबसवा शामिल हैं।

इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने वोटर लिस्ट से नाम हटवाने और इस तरह योग्य वोटरों के वोटिंग अधिकारों पर असर डालने की कोशिश में चुनाव अधिकारियों को गलत जानकारी दी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन कामों का मकसद न सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम हटवाना था, बल्कि समुदायों के बीच बंटवारा और नफरत पैदा करना और वोटरों की भावनाओं और चुनावी अधिकारों को ठेस पहुंचाना भी था। शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच चल रही है।