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केरल: चेरानल्लूर सड़क हादसा की जांच में लापरवाही पर चार पुलिसकर्मी निलंबित

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कोच्चि, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल पुलिस ने चेरानल्लूर में हुए एक घातक सड़क हादसे की जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मामले में जांच प्रक्रिया में गंभीर चूक सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।

घटना में शामिल लग्जरी गाड़ी को एक एडिशनल सेशन जज का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था। मामले की जांच के तरीके को लेकर हुई व्यापक आलोचना और विरोध प्रदर्शनों के बाद यह कार्रवाई की गई है।

यह निलंबन तब हुआ, जब एडीजीपी पी. विजयन यहां पहुंचे और दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद वे जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार से मिलने के लिए घर गए और जांच टीम के साथ चर्चा की।

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सीआई श्याम कुमार, स्टेशन हाउस ऑफिसर विश्वजीत, ग्रेड एसआई मनोज और सिविल पुलिस ऑफिसर अरुणजीत शामिल हैं।

यह कार्रवाई तब हुई है, जब गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने मंगलवार को केरल विधानसभा में स्वीकार किया कि दुर्घटना की जांच में पुलिस से गलतियां हुई थीं।

यह दुर्घटना 25 अक्टूबर को रात करीब 2:20 बजे कोच्चि के पास चेरानाल्लूर में कंटेनर रोड पर हुई। 55 वर्षीय जया बालकृष्णन सड़क किनारे अपनी खाने-पीने की दुकान बंद करके घर लौट रहे थे, तभी एक मर्सिडीज-बेंज ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि यह कार जज का नाबालिग बेटा चला रहा था।

पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत लापरवाही से गाड़ी चलाने और लापरवाही के कारण मौत का मामला दर्ज किया था। बाद में इसमें बीएनएस की धारा 105 भी जोड़ दी गई, जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है।

कोच्चि सिटी पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा की अदालत में तैनात एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को भी आरोपी बनाया है। दुर्घटना में शामिल कार उन्हीं के नाम पर रजिस्टर्ड है।

इस कानूनी प्रावधान के तहत यदि कोई नाबालिग मोटर वाहन से जुड़ा अपराध करता है तो वाहन के मालिक या अभिभावक को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ कानूनी अपवाद भी हैं।

पुलिस ने बताया है कि न्यायिक अधिकारी के खिलाफ यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार की जा रही है। इस बारे में जिला न्यायपालिका और केरल उच्च न्यायालय को भी सूचित किया जाएगा।

पीड़ित के परिवार और कई राजनीतिक व युवा संगठनों ने मामले की जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी और जवाबदेही तय करने को कहा था। वहीं, सोमवार को एर्नाकुलम स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने 17 वर्षीय आरोपी को जमानत दे दी।

इस मामले ने लोगों का काफी ध्यान खींचा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब किसी जानलेवा दुर्घटना में कोई न्यायिक अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति का परिवार शामिल होता है, तो पुलिस की जवाबदेही क्या होती है और कानून कैसे लागू किया जाता है।