नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, नेताओं और अफसरों की संपत्तियों की होगी जांच

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काठमांडू, 28 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल की नई सरकार ने राजनीतिक नेताओं और उच्च पदस्थ अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने का बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने शनिवार को 100 बिंदुओं वाला सुशासन सुधार एजेंडा जारी करते हुए इसकी घोषणा की।

सरकार ने कहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर एक सशक्त समिति का गठन किया जाएगा, जो 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच करेगी।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले तीन दशकों में सत्ता में रहे कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और उनकी जांच की मांग लगातार उठ रही है।

सरकार के अनुसार, इस समिति का उद्देश्य देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, संपत्तियों को छिपाने की प्रवृत्ति और दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त करना है।

योजना के तहत पहले चरण में 2006 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे प्रमुख नेताओं और वरिष्ठ नौकरशाहों की संपत्तियों का संग्रह, सत्यापन और जांच की जाएगी। दूसरे चरण में 1990 से 2005 के बीच पद पर रहे प्रमुख लोगों की संपत्तियों की जांच की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन के पीछे नेताओं में कथित भ्रष्टाचार को एक बड़ी वजह माना गया था, जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को हटना पड़ा था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को संस्थागत रूप देने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक 100 दिनों के भीतर एक डिजिटल एसेट रजिस्ट्री भी बनाएगा। इसमें बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, शेयर निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।

सरकार ने यह भी बताया कि एक जोखिम-आधारित संकेतक प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे संदिग्ध लेन-देन की स्वतः पहचान कर संबंधित एजेंसियों को जांच के लिए भेजा जा सकेगा।

इस फैसले को नेपाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।