नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है।
नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।
सरकार ने मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, हलवाई व्यवसायों और अन्य संस्थागत खरीदारों को इस श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी।
हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि वास्तविक खपत और खरीदारी का पता लगाया जा सके।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब सरकार पहले ही डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा को 30 दिनों तक सीमित कर चुकी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 52.30 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानी चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

