नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ और ‘इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026’को पेश किया।
‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया, जबकि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने ‘इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026’ पेश किया।
सरकार इन दोनों बिल के जरिए औपनिवेशिक दौर के एक कानून की जगह एक नया कानून ला रही है। इसका मकसद बैंकिंग रिकॉर्ड तक बिना रोक-टोक पहुंच के बजाय, बेहतर और सटीक न्यायिक निगरानी पर जोर देना है। साथ ही, यह बैंकों को गैर-जरूरी कानूनी कार्यवाही से बचाते हुए बैंकिंग सबूतों तक पहुँच बनाए रखने की कोशिश करता है।
बैंकर बुक्स एविडेंस बिल, 2026 के जरिए सरकार बैंकर बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह नया कानून लाना चाहती है। पुराने कानून ने 125 से ज्यादा सालों तक अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के नियमों को तय किया है।
इस प्रस्तावित कानून का मकसद “बैंकरों की किताबों से जुड़े सबूतों के लिए कानून बनाना और इसे आज के डिजिटल बैंकिंग तरीकों के हिसाब से ढालना” है।
इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 का मकसद संस्थान को ‘बॉडी कॉर्पोरेट’ के तौर पर शामिल करना है, ताकि इसके कामकाज को बेहतर बनाया जा सके, पढ़ाई-लिखाई और रिसर्च में बेहतरीन काम को बढ़ावा दिया जा सके और इस क्षेत्र की उभरती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
बिल में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति संस्थान के ‘विजिटर’ होंगे और एक ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ बनाने का प्रावधान होगा, जो इसकी मुख्य नीति-निर्धारक संस्था होगी। बोर्ड की अध्यक्षता एक चेयरपर्सन करेंगे, जो एकेडमिक्स, इंडस्ट्री, शिक्षा, पब्लिक पॉलिसी और स्टैटिस्टिकल साइंस के क्षेत्र से कोई जाने-माने व्यक्ति होंगे।
इस बीच, नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर दान में कथित चोरी के मुद्दों पर विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, जिससे सदन में प्रश्नकाल नहीं हो सका।

