Saturday, May 23, 2026
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150 उद्योगपतियों के साथ कनाडा दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर रहेगा फोकस

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नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 मई तक कनाडा दौरे पर जाएंगे। इस दौरान उनके साथ करीब 150 उद्योग जगत के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी होगा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।

भारत और कनाडा अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

एक प्रेस ब्रीफिंग में गोयल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि कनाडा के साथ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया जाएगा। बातचीत में तकनीक, फूड प्रोसेसिंग, स्वच्छ ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग पर भी जोर रहेगा।

मंत्री के अनुसार, कनाडाई पेंशन फंड्स और कंपनियां भारत में करीब 100 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि लगभग 600 कनाडाई कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और दोनों देश इस संख्या को बढ़ाकर 1,000 तक ले जाना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच कृषि, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत संबंध बने हुए हैं और व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू हो चुकी है।

गोयल 25 मई को ओटावा और 26-27 मई को टोरंटो में भारतीय उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

यह यात्रा मार्च 2026 में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा तय किए गए एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है। इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई गति देना है।

इस यात्रा का मुख्य फोकस भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) की बातचीत को आगे बढ़ाना रहेगा।

मार्च 2026 में प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर किए गए थे। पहली दौर की बातचीत मार्च में वर्चुअल माध्यम से हुई थी, जबकि दूसरा दौर 8 मई को समाप्त हुआ।

इस दौरे के दौरान 25 से 29 मई तक ओटावा में बातचीत का अगला दौर होगा। दोनों देश 2026 के अंत तक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सीईपीए समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 4.65 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025 में 8.5 अरब डॉलर पर है, जिसमें कई क्षेत्रों में विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।

इस बीच, पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि उर्वरकों की बढ़ी कीमतों का बोझ किसानों पर नहीं डाला गया है और पूरा खर्च केंद्र सरकार ने उठाया है। उन्होंने कहा, “हर क्षेत्र में भारत ने दुनिया को दिखाया है कि वह आत्मविश्वासी अर्थव्यवस्था है, जो आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही है और दुनिया के साथ समान एवं निष्पक्ष शर्तों पर संबंध बना रही है।”

गोयल ने कहा कि यह बात भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की सफल यात्रा से भी स्पष्ट होती है, जिनसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

उन्होंने कहा, “भारत की मौजूदा स्थिति संयोग नहीं है। यह पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए गए संरचनात्मक सुधारों, केंद्रित रणनीतियों और परिवर्तनकारी पहलों का परिणाम है।”

मंत्री ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच एफटीए से देश में बड़े पैमाने पर निवेश के अवसर खुलेंगे और दोनों देशों की साझा आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार के अनुसार, मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत और स्थिर बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात बढ़ाकर किसानों की जरूरतों से अधिक उपलब्धता सुनिश्चित की है।

देश में फिलहाल 199.65 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) उर्वरक का स्टॉक मौजूद है, जो मौसमी मांग के 51 प्रतिशत से अधिक को पूरा करता है। यह सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है। इससे बेहतर एडवांस स्टॉकिंग और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का संकेत मिलता है।

हालिया संकट के बाद घरेलू उत्पादन और आयात को तेजी से बढ़ाया गया, जिससे कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 एलएमटी और भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे आयात का योगदान 19.94 एलएमटी रहा।