गांधीनगर, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। गांधीनगर नगर निगम (जीएमसी) ने लावारिस मवेशियों को पकड़ने के काम में लगे नगर निगम के एक कर्मचारी के साथ मारपीट करने और उसे धमकी देने के आरोपी पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। नगर निगम ने मांग की है कि इस व्यक्ति के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट (पीएएसए) के तहत कार्रवाई की जाए।
नगर आयुक्त जेएन वाघेला ने सक्षम अधिकारी को एक लिखित शिकायत दी है। इसमें 17 अक्टूबर को एक कर्मचारी पर हुए हमले का जिक्र किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि यह व्यक्ति पहले भी नगर निगम की मवेशी पकड़ने वाली टीमों को डरा-धमका चुका है और उनके काम में बाधा डाल चुका है।
नगर निकाय के मुताबिक, यह घटना शाम करीब 5:50 बजे हुई, जब सेक्टर 30 स्थित पशु बाड़े (कैटल पाउंड) में तैनात एक कर्मचारी सेक्टर 17 में निगम के प्रधान कार्यालय की ओर जा रहा था।
सीएच-7 की ओर जाने वाली सड़क पर आवारा गायों को देखकर, कर्मचारी ने आधिकारिक काम के लिए उनकी तस्वीरें लेनी शुरू कीं। इसी दौरान, एक व्यक्ति ने उसे गालियां दीं, थप्पड़ मारा, उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
निगम ने बताया कि यही व्यक्ति पहले भी लावारिस पशुओं को पकड़ने वाली टीम के सदस्यों को धमकाने, डराने, उनका पीछा करने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी घटनाओं में शामिल रहा है।
आयुक्त ने उपलब्ध तथ्यों और सबूतों के आधार पर पीएएसए और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
निवारक निरोध कानून (प्रिवेंटिव डिटेंशन लॉ) के तहत कार्रवाई की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब नगर निकाय बिना किसी रुकावट के लावारिस पशुओं को नियंत्रित करने का अभियान चला रहा है।
नगर निगम का ‘कैटल न्यूसेंस कंट्रोल डिपार्टमेंट’ (सीएमसीडी), ‘स्ट्रे कैटल न्यूसेंस प्रिवेंशन पॉलिसी-2023’ के तहत शहर में लावारिस पशुओं की समस्या से निपटने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा है।
नगर निकाय ने कहा है कि वह जरूरी सुरक्षा और कानूनी कदम उठाएगा, ताकि इस अभियान में लगे कर्मचारी बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन कर रहे कर्मचारियों पर हमला करना, उन्हें धमकाना या उनके काम में बाधा डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस शिकायत में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जिस पर हमला करने और नगर निगम के काम में बार-बार बाधा डालने का आरोप है। पीएएसए के तहत कोई भी कार्रवाई लागू कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के फैसले के अधीन होगी।
