Friday, August 14, 2026
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आजादी की पूर्व संध्‍या पर गुजरात के गवर्नर और मुख्यमंत्री ने विभाजन के पीड़ितों को किया याद

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अमरेली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। अमरेली में 1947 में भारत के बंटवारे के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों के दुख-दर्द को शुक्रवार को याद किया गया। गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए इस त्रासदी से सीख लेने का आह्वान किया।

अमरेली में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले राज्यस्तरीय ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में गवर्नर, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने बंटवारे के दौरान जान गंवाने वालों की याद में दो मिनट का मौन रखा।

सभा को संबोधित करते हुए गवर्नर ने कहा कि 1947 के बंटवारे के ‘अमानवीय अत्याचार और भयावह दृश्य’ आज भी बहुत दर्दनाक हैं। इस उथल-पुथल के दौरान लाखों बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने अपनी जान, घर और परिवार खो दिए।

राज्‍यपाल ने भगवान राम की लंका पर विजय का जिक्र करते हुए कहा कि मां और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। उन्होंने बंटवारे के दौरान विस्थापित हुए उन परिवारों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारी मुश्किलों का सामना किया, अपनी जिंदगी को फिर से संवारा और कड़ी मेहनत से देश के विकास में योगदान दिया।

देवव्रत ने कहा कि हर साल मनाया जाने वाला ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ बंटवारे से हुए दुख को याद करने और युवा पीढ़ी को उस इतिहास से सीखने के लिए प्रेरित करने के मकसद से मनाया जाता है। एक मजबूत भारत बनाने के लिए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और भाईचारे को बनाए रखना जरूरी है।

सीएम पटेल ने याद दिलाया कि भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था, लेकिन देश का बंटवारा एक दिन पहले ही हो गया था। उन्होंने बंटवारे को एक बेहद दुखद घटना बताया, जिसने अनगिनत परिवारों को अलग कर दिया। कई लोगों को रातोंरात अपने घर, जमीन और पीढ़ियों पुराने रिश्ते छोड़कर शरणार्थी बनने पर मजबूर होना पड़ा।

पटेल ने कहा कि देश ने आजादी के लिए भारी कीमत चुकाई है। 2021 से 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाया जा रहा है, ताकि बंटवारे की त्रासदी को याद रखा जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसकी दर्दनाक यादें और बलिदान वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवित रहें।

उन्होंने कहा कि एक मजबूत भविष्य बनाने के लिए इतिहास और बलिदान का सम्मान करना जरूरी है, जिस तरह देश आजादी की लड़ाई के नायकों को याद करता है, उसी तरह बंटवारे के दौरान पीड़ित हुए लाखों निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देना भी एक नैतिक कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री ने बंटवारे की याद को देश की मौजूदा विकास यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ रहा है।

सीएम पटेल ने 2047 में आजादी के सौ साल पूरे होने के संदर्भ में प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत- 2047’ के लक्ष्य का जिक्र किया और नागरिकों से अपने जीवन में ‘पंच प्राण’ को अपनाने का आह्वान किया।

जिला प्रभारी और कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि बंटवारे के दर्द और भयावहता को समझना मुश्किल है। आजादी खुशियां लेकर आई थी, जबकि बंटवारा गहरा दुख लेकर आया था, और युवा पीढ़ी को इन दोनों अनुभवों से सीखने की जरूरत है।