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गुजरात में डिजिटल प्रमाणपत्रों पर अब लगेगी आधिकारिक मुहर, नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी राहत

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गांधीनगर, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार के डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से प्रमाणपत्र और सत्यापन प्राप्त करने वाले नागरिकों को दस्तावेजों पर आधिकारिक मुहर प्रदर्शित करने की प्रणाली लागू होने के बाद उन पर मुहर लगवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में अलग से जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 21 अक्टूबर को जारी एक परिपत्र के माध्यम से निर्देश दिया है कि डिजिटल रूप से जारी किए गए प्रमाणपत्रों और सत्यापन पत्रों पर सक्षम जारीकर्ता की आधिकारिक गोल मुहर और संबंधित कार्यालय का विवरण प्रदर्शित करने के लिए एक प्रणाली विकसित की जाए।

इस कदम का उद्देश्य अतिरिक्त औपचारिकता को कम करना, नागरिकों का समय बचाना और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

वर्तमान में डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से प्राप्त ई-प्रमाणपत्रों पर जारीकर्ता की मुहर नहीं होती है। परिणामस्वरूप, आवेदकों को दस्तावेजों पर मुहर लगवाने के लिए संबंधित सरकारी कार्यालय में अलग से जाना पड़ता है, जिससे उन्हें प्राप्त करने और उपयोग करने में लगने वाला समय और प्रयास बढ़ जाता है।

नई व्यवस्था के तहत प्रमाण पत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी की आधिकारिक मुहर और कार्यालय का विवरण लागू कानूनों, नियमों और निर्देशों के अनुसार दस्तावेज पर प्रदर्शित किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी होने के बाद कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। यह पहल राज्य सरकार के ‘डिजिटल गुजरात 2.0’ के प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सेवा वितरण को अधिक सुलभ बनाना है।

सरकार ने नागरिकों द्वारा बार-बार उपयोग की जाने वाली और व्यापक रूप से आवश्यक सेवाओं की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन (जीपीआर) और व्यावसायिक प्रक्रिया पुनर्गठन (बीपीआर) शुरू किया है।

व्यापक उद्देश्य ‘डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट’ दृष्टिकोण के तहत संपूर्ण सेवा वितरण प्रक्रिया को डिजिटाइज करना और इसे डिजिटल गुजरात 2.0 के साथ एकीकृत करना है, जिससे भौतिक कागजी कार्रवाई और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हो सके।

परिपत्र के अनुसार, संबंधित विभाग इस निर्णय को लागू करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ समन्वय करेंगे। आवश्यक विभागीय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, जारीकर्ता प्राधिकारियों की मुहरों और विवरणों को शामिल करने के लिए डिजिटल पोर्टल में तकनीकी परिवर्तन किए जाएंगे।

सरकार को उम्मीद है कि इन परिवर्तनों से डिजिटल रूप से जारी किए गए दस्तावेजों की पहचान और प्रामाणिकता अधिक स्पष्ट हो जाएगी और आवेदकों के लिए अतिरिक्त औपचारिकताएं कम हो जाएंगी।

इस पहल का उद्देश्य आवेदन से लेकर प्रमाणपत्रों की प्राप्ति तक ऑनलाइन सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाकर कागज रहित शासन को बढ़ावा देना भी है।

यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों के तहत लिया गया है। परिपत्र में प्रस्तावित व्यवस्था का उल्लेख है, जिसका कार्यान्वयन विभागीय समन्वय और पोर्टलों में आवश्यक तकनीकी संशोधनों पर निर्भर है।