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गुजरात के पोषण अभियान में 2.43 करोड़ गतिविधियां संपन्न हुईं, जागरूकता अभियान तेज

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गांधीनगर, 29 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात ने ‘पोषण माह-2026’ के दौरान पोषण संबंधी 2.43 करोड़ से अधिक गतिविधियां दर्ज की हैं। राज्य का मुख्य उद्देश्य आहार विविधता, नियमित विकास निगरानी और बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों के दौरान देखभाल के माध्यम से कुपोषण से निपटना है।

राज्यव्यापी अभियान ‘अपनी आंगनवाड़ी, अपनी जिम्मेदारी’ का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने किया।

इस अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य, पंचायत, ग्रामीण विकास और शिक्षा विभाग, स्थानीय स्वशासन निकाय, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह, अभिभावक और समुदाय शामिल हैं।

27 सितंबर तक दर्ज की गई 24 लाख से अधिक गतिविधियों में से महिला एवं बाल विकास विभाग की 56.13 लाख गतिविधियां थीं, जबकि अन्य विभागों और संबद्ध एजेंसियों द्वारा लगभग 18 लाख गतिविधियां संचालित की गईं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आयुष विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायत विभाग और शिक्षा विभाग पांच प्रमुख योगदानकर्ता थे।

जिला स्तर पर, महिसागर, वलसाड, पाटन, आनंद और मेहसाना में सबसे अधिक गतिविधियां दर्ज की गईं। वलसाड में, जिला कलेक्टर ने अभियान के तहत ‘पोषण जागृति’ रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस वर्ष का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देना और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों को हतोत्साहित करना है। गतिविधियों में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, बाजरा या श्री अन्न, दालें, हरी सब्जियां, फल, दूध, मेवे और बीज पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य भर में पौष्टिक व्यंजनों के प्रदर्शन, टेक होम राशन (टीएचआर) और बाजरा से बने व्यंजनों की प्रदर्शनियां, पोषण मेले और संतुलित आहार पर मार्गदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।

सूरत में, कॉलेज के छात्र भी स्वस्थ आहार और जंक फूड के हानिकारक प्रभावों पर केंद्रित जागरूकता गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।

यह अभियान प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका को मजबूत करने का भी प्रयास कर रहा है।

केंद्रों का उपयोग ताजा, गर्म, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है, जबकि सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों को सक्रिय किया जा रहा है।

एसएनपी के मेनू बोर्ड भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं, साथ ही ‘मारी आंगनवाड़ी, मारी जवाबदारी’ (मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी) दृष्टिकोण के तहत सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा, प्रारंभिक प्रोत्साहन और बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों और पहले छह वर्षों के दौरान संवेदनशील देखभाल पर एक साथ ध्यान केंद्रित कर रही है।

बच्चों का नियमित रूप से वजन और लंबाई मापी जा रही है और उनके विवरण पोषण ट्रैकर पर दर्ज किए जा रहे हैं ताकि कुपोषण की शीघ्र पहचान हो सके।

कुपोषित पाए गए बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से ‘पोषण संगम’ जैसी पहलों के तहत उपचार और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।

यह अभियान 2026 में ‘प्रधान मंत्री मातृ वंदना योजना’ के 10 वर्ष पूरे होने के साथ भी मेल खाता है।