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कल्पना सोरेन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट मामले में आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

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नई दिल्ली/रांची, 29 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट करने के मामले में आरोपी 30 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सहदेव उरांव उर्फ सहदेव ओरांव को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने आरोपी के एक साल से अधिक समय से हिरासत में रहने और उसके खिलाफ लगाए गए अपराधों में अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान होने को जमानत का आधार माना।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की मौजूदा स्थिति में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। यह भी दलील दी गई कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर आधारित है और संबंधित डिजिटल साक्ष्य पहले ही पुलिस के कब्जे में हैं।

सहदेव उरांव को इस मामले में 6 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था। कथित फेसबुक पोस्ट एक ‘आदिवासी लड़का राजू उरांव’ नाम के अकाउंट से किए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को इस अकाउंट से कल्पना सोरेन की तस्वीर के साथ कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की गई थी। इसके अगले दिन रांची साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी सीधे कल्पना सोरेन की शिकायत पर दर्ज नहीं हुई थी।

इस मामले में सहदेव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी की ओर से मामले में डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण बताया गया है। आरोपी ने पहले झारखंड हाई कोर्ट में भी जमानत की मांग की थी, लेकिन 17 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह भी बताया गया कि इसी कथित घटना से संबंधित एक अन्य मामले में उसे फरवरी 2026 में जमानत मिल चुकी है। यह मामला कांके प्रखंड समन्वय समिति के प्रमुख जावेद अंसारी की शिकायत से जुड़ा बताया गया है। दोनों मामलों में प्राथमिकी सीधे कल्पना सोरेन की ओर से दर्ज नहीं कराई गई थी।

इससे पहले अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट की इसी पीठ ने सहदेव की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया था। अब अदालत ने लंबी हिरासत, जांच पूरी होने और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं होने के आधार पर उसे जमानत दी है।