पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग की वजह लीकेज, मई के दूसरे पखवाड़े में शुरू होगा संचालन: एचपीसीएल

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने कहा है कि राजस्थान स्थित उसके संयुक्त उद्यम रिफाइनरी में लगी आग का संभावित कारण क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट के प्रेशर गेज से हुआ रिसाव था। कंपनी के अनुसार, मरम्मत कार्य तीन से चार सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद मई के दूसरे पखवाड़े में रिफाइनरी का संचालन फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

20 अप्रैल को राजस्थान के पचपदरा में 79,450 करोड़ रुपए की लागत से बनी एचपीसीएल रिफाइनरी में आग लग गई थी। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित उद्घाटन से एक दिन पहले हुई थी। आग रिफाइनरी की मुख्य यूनिट यानी क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में लगी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह आग हीट एक्सचेंजर सर्किट में वाल्व या फ्लैंज से हुए हाइड्रोकार्बन लीकेज के कारण लगी थी।

स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कहा कि 20 अप्रैल की घटना की विस्तृत जांच में पता चला है कि आग हीट एक्सचेंजर स्टैक तक सीमित थी, जिससे 6 हीट एक्सचेंजर और उनसे जुड़े उपकरण प्रभावित हुए।

कंपनी ने कहा, ”मौके के हालात और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना जा रहा है कि आग की वजह वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज के पॉइंट से लीकेज होना था।”

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कहा, ”मरम्मत का काम जारी है और इसके अगले 3-4 हफ्तों में पूरा होने की उम्मीद है। क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट को मई 2026 के दूसरे पखवाड़े में फिर से शुरू करने की संभावना है।”

कंपनी ने यह भी कहा कि रिफाइनरी की अन्य सेकेंडरी यूनिट्स का कमीशनिंग कार्य अंतिम चरण में है और योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।

एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और नेफ्था जैसे प्रमुख ईंधनों का ट्रायल प्रोडक्शन मई के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद यूनिट्स को स्थिर कर पूरी तरह चालू किया जाएगा।

रिफाइनरी के 21 अप्रैल को होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया है। नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस घटना की अलग से जांच शुरू कर दी है। इस जांच के लिए एमआरपीएल के पूर्व प्रबंध निदेशक एम. वेंकटेश की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम बनाई गई है।

दुनियाभर में रिफाइनरियों में कमीशनिंग और स्टार्टअप के दौरान आग, विस्फोट और बड़े हादसों का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि इसी समय नए या मेंटेन किए गए हाई-प्रेशर और हाई-टेम्परेचर सिस्टम में हाइड्रोकार्बन डाले जाते हैं।

केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल को जारी बयान में कहा था कि यह रिफाइनरी परियोजना 1 जुलाई से व्यावसायिक संचालन शुरू करने वाली थी। उसी बयान में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा परियोजना की लागत बढ़ाने की मंजूरी की जानकारी दी गई थी।

राजस्थान रिफाइनरी भारत की 24वीं रिफाइनरी होगी और देश की दूसरी सबसे जटिल (कॉम्प्लेक्स) रिफाइनरी मानी जा रही है।

राजस्थान के बालोतरा जिले में बन रही यह रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 90 लाख टन सालाना क्षमता की होगी। इसमें पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर खास ध्यान दिया गया है, जो भारत की वैल्यू-एडेड उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है।

इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17 है और इसमें पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक रहेगा। यह वैश्विक स्तर पर दक्षता और स्थिरता के मानकों के अनुरूप है।

पूरी तरह चालू होने के बाद यह कॉम्प्लेक्स पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन के साथ-साथ पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन और बेंजीन, ब्यूटाडाइन जैसे प्रमुख औद्योगिक रसायनों का भी उत्पादन करेगा।

इन उत्पादों का उपयोग परिवहन, पैकेजिंग, दवा और निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।