Wednesday, July 29, 2026
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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए पहुंचा, निर्यात 12 वर्षों में 11 गुना बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए के पार: सरकार

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नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 11.32 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जो देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात क्षमता में आई तेज प्रगति को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि देश का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 25 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, केवल मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में ही पूरी वैल्यू चेन के दौरान लगभग 12 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है।

मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मोबाइल फोन निर्माण के कुछ हाई-प्रिसीजन सेगमेंट में कुल कार्यबल का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है, जिससे यह क्षेत्र लैंगिक समावेशी औद्योगिक विकास का भी उदाहरण बन रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार द्वारा मोबाइल फोन, आईटी हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन, निर्यात और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सरकार के अनुसार, स्मार्टफोन, जो वर्ष 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी शामिल नहीं थे, अब वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोलियम, रत्न एवं आभूषण जैसे पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन गए हैं।

जितिन प्रसाद ने कहा कि आज भारत में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही भारत अब मोबाइल फोन उत्पादन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है।

उन्होंने बताया कि भारत 2014 में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक (नेट इंपोर्टर) था, लेकिन अब शुद्ध निर्यातक (नेट एक्सपोर्टर) बन गया है। मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देने वाली प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई-एलएसईएम) योजना के तहत अब तक देश भर में लगभग 96,000 करोड़ रुपए (करीब 14 अरब डॉलर) का निवेश आकर्षित किया गया है।

सरकार ने वर्ष 2023 में आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई स्कीम 2.0 भी शुरू की, जिसका उद्देश्य लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और अन्य आईटी हार्डवेयर के लिए मजबूत घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करना, बड़े निवेश आकर्षित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाना है।

मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 24,385.89 करोड़ रुपए का संचयी उत्पादन, 1,056.36 करोड़ रुपए का निवेश और 5,216 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए जा चुके हैं।

इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत सरकार ने योजना अवधि में 59,350 करोड़ रुपए के निवेश और 91,600 प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य रखा है।

अब तक इस योजना के तहत 23 उत्पादों के लिए 75 आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं। इन स्वीकृत परियोजनाओं से 61,671 करोड़ रुपए का निवेश आने, 4.51 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन होने और 65,040 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।