अगरतला, 29 जुलाई (आईएएनएस)। सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी मिशन को आगे बढ़ाते हुए, हाल ही में त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में महिलाओं को जूट बैग बनाने की कला में माहिर बनाने के लिए 20 दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। ग्रामीण जीविका मिशन की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम चारिलम आरडी ऑफिस की दोमंजिला इमारत में हुआ, जहां 30 से ज्यादा महिलाओं को सिलाई की तकनीकें सिखाई और समझाई जा रही हैं।
ग्रामीण जीविका मिशन के तहत, चारिलम ब्लॉक की 30 महिलाएं जूट बैग बनाने की 20 दिन की ट्रेनिंग ले रही हैं। यह ट्रेनिंग 9 जुलाई को शुरू हुई और 31 जुलाई तक चलेगी। खास बात यह है कि ‘लखपति दीदी योजना’ एक सरकारी प्रोग्राम है, जो स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में शामिल ग्रामीण महिलाओं को सालाना 1 लाख रुपए की स्थिर घरेलू आय कमाने में मदद करता है।
चारिलम ब्लॉक पंचायत समिति की चेयरपर्सन खेला भौमिक देबनाथ ने बुधवार को ट्रेनिंग कैंप का दौरा किया। ग्रामीण जीविका मिशन चारिलम आरडी ब्लॉक आने वाले दिनों में इन महिलाओं के साथ मिलकर जूट बैग बनाने की एक यूनिट शुरू करने की योजना बना रहा है, ताकि महिलाएं जूट बैग से जुड़े प्रोडक्ट, जैसे फाइल फोल्डर और घर के काम आने वाले कई तरह के सामान, बना सकें और उन्हें बाजार में बेच सकें।
20 दिन की ट्रेनिंग के बाद, आने वाले समय में एक यूनिट खोलने की योजना है ताकि महिलाएं फाइल की-बैग, बैग, जूट के डोरमैट और घर की सजावट के लिए जूट से बनी कई तरह की चीजें बना सकें।
इस प्रोग्राम से जुड़ी कई महिलाओं ने कहा कि यह उनके सशक्तीकरण की दिशा में एक कदम है और इससे उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
‘लखपति दीदी’ संपा दत्ता ने कहा कि यहां लगभग 30 महिलाएं जूट के बैग बनाने का काम कर रही हैं। केंद्र सरकार चाहती है कि हर महिला आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बने। इसी कारण अलग-अलग तरह के प्रशिक्षण से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। हमारे चारिलम में कई ट्रेनिंग सेशन होते हैं, जैसे बांस की कलाकारी और खिलौने बनाना। लेकिन, इन सबके बीच, यहां की महिलाएं बैग बनाने की ट्रेनिंग से खास तौर पर खुश हैं। आजकल, जैसा कि आप देख सकते हैं, बाजार में प्लास्टिक के बैग का बोलबाला है, लेकिन हम उनकी जगह जूट के बैग और दूसरी चीजें जैसे डोरमैट, सजावटी वॉल मैट और हैंडबैग इस्तेमाल कर सकते हैं। जूट कुदरती तौर पर आसानी से खराब नहीं होता है।
पिंटू भौमिक नाम की एक और एसएचजी महिला ने कहा कि इस पहल के तहत, हमने लगभग 20 दिन पहले बैग बनाने की ट्रेनिंग शुरू की थी। उन तरीकों का इस्तेमाल करके, हम अब बहुत अच्छे प्रोडक्ट बना रहे हैं। हम आने वाले दिनों में सरकारी विभागों में फाइल कवर, बैग वगैरह के लिए इन प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि हमारी बहनें आत्मनिर्भर बन सकें। हमारा अगला प्लान एक पूरी यूनिट बनाना है ताकि वे कमाई कर सकें और उन्हें रोजगार मिल सके। हमारा मकसद है कि सभी सेल्फ-हेल्प ग्रुप की बहनें ‘लखपति दीदी’ बनें।
उन्होंने आगे कहा कि लोग हमेशा प्लास्टिक से बचने की बात करते हैं क्योंकि इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। जूट के बैग का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा। अभी इन बैग्स की बहुत ज्यादा मांग है। इनका इस्तेमाल लगभग हर कार्यक्रम में किया जाता है।


