Wednesday, June 3, 2026
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प्रभावी सरकारी सुधारों के चलते मध्य वर्ग बना देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़

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नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। बीते 12 वर्षों में सरकार ने देश के मध्य वर्ग को मजबूत बनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिसमें टैक्स में कटौती करना, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना, इंश्योरेंस कवरेज और पेंशन का विस्तार करना शामिल हैं। इससे वित्तीय रूप से मध्य वर्ग पहले के मुकाबले मजबूत हुआ है।

इसके अलावा, रियायती दरों पर लोन और डिजिटल सुधारों से बचत करने और उधार लेने के तरीके के साथ फाइनेंशियल प्लानिंग अधिक आसान हुई है।

सरकार के कर सुधारों ने मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम कर दिया है। 2014 में, 2.5 लाख रुपए तक की आय वाले व्यक्तियों पर कोई कर नहीं लगता था। अब, नई कर प्रणाली (जो 2023 में लागू हुई) के तहत, 12 लाख रुपए तक वार्षिक आय अर्जित करने वाले व्यक्ति (मानक कटौती सहित वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए 12.75 लाख रुपए) शून्य कर का भुगतान करते हैं। इससे उनकी बचत और व्यय योग्य आय वृद्धि हुई है।

जुलाई 2017 में लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), स्वतंत्रता के बाद से भारत का सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर सुधार है। इसने कई केंद्रीय और राज्य करों को एक ही प्रणाली में एकीकृत कर दिया, जिससे एक साझा राष्ट्रीय बाजार का निर्माण हुआ।

विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लिए, जीएसटी ने करों को सरल बनाकर और दैनिक खर्चों को कम करके कई ठोस लाभ प्रदान किए हैं। आवश्यक वस्तुओं पर कम दरों और तर्कसंगत कर स्लैबों ने दैनिक उपभोग को अधिक किफायती बना दिया है। लगभग नौ वर्षों में, यह दर युक्तिकरण और डिजिटलीकरण के माध्यम से विकसित हुआ है और अप्रत्यक्ष कराधान की रीढ़ बन गया है। जीएसटी करदाताओं का आधार 2017 में 66.5 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ हो गया।

अप्रैल 2025 से प्रभावी एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) भारत में केंद्र सरकार के कर्मचारियों – जो मध्यम वर्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं – के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मजबूत करती है। यह अंशदायी संरचना के तहत कर्मचारी और सरकारी अंशदान को जोड़ती है और सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित, मुद्रास्फीति-संबंधी पेंशन लाभ प्रदान करती है। यूपीएस सेवानिवृत्ति के बाद (कम से कम 10 वर्ष की सेवा के साथ) प्रति माह 10,000 रुपए की न्यूनतम पेंशन की गारंटी देता है।

प्रीमियम मात्रा के हिसाब से भारत वैश्विक स्तर पर 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार बनकर उभरा है, जो वित्तीय सुरक्षा के विस्तार को दर्शाता है। बीमा का बढ़ता महत्व घरेलू वित्त में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2018-19 में बीमा और पेंशन फंडों की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 29.6 प्रतिशत हो गई। यह परिवारों में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और दीर्घकालिक सुरक्षा की ओर रुझान को दर्शाता है।

बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच, सुलभ स्वास्थ्य सेवा, मजबूत शिक्षा और कौशल विकास, साथ ही सुचारू डिजिटल शासन ने रोजमर्रा की सुविधा को बढ़ाया है। ये सभी उपाय मिलकर धन सृजन और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करते हैं।

ओईसीडी के पूर्वानुमानों के अनुसार, 2030 से 2035 के बीच भारत मध्यम वर्ग की आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा। यह लाखों भारतीयों की बढ़ती आय, विस्तारित आर्थिक अवसरों और बेहतर जीवन स्तर को दर्शाता है। साथ ही, यह मजबूत उपभोक्ता मांग, बढ़ती व्यय क्षमता और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते प्रभाव का भी संकेत है।