Saturday, June 6, 2026
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इस्लामाबाद: यौन उत्पीड़न और अपहरण के मामले बढ़े, 5 महीनों में 432 केस दर्ज

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इस्लामाबाद, 6 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस साल जनवरी से मई के बीच यौन उत्पीड़न और अपहरण के कुल 432 मामले दर्ज किए गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

देश के प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, इस अवधि में कुल 55 मामले यौन उत्पीड़न से जुड़े दर्ज किए गए।

जोन-वार आंकड़ों के मुताबिक, यौन उत्पीड़न के 55 मामलों में सबसे ज्यादा 15 मामले सोआन जोन में दर्ज हुए। इसके बाद सदर जोन में 13, रूरल जोन में 12, इंडस्ट्रियल एरिया जोन में 9 और सिटी जोन में 6 मामले सामने आए।

इसके अलावा, अपहरण के 377 मामलों का भी विवरण सामने आया है। इनमें सबसे ज्यादा 99 मामले सदर जोन में दर्ज हुए। सोआन जोन में 89, रूरल जोन में 76, सिटी जोन में 44 और इंडस्ट्रियल एरिया जोन में 29 मामले दर्ज किए गए।

अपहरण के एक मामले में एक व्यक्ति को इस्लामाबाद से अगवा कर बाद में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मृत पाया गया। एक अन्य मामले में पिंडोरियन इलाके में 28 फरवरी को तीन लोगों पर एक लड़के के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, कई अन्य गंभीर मामलों में भी महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। 19 मार्च को I-16 इलाके में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज हुआ, जबकि 31 मार्च को सिहाला में एक लड़के के साथ यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई।

इसी अवधि में दर्ज 24 अन्य मामलों में पीड़ितों में 15 लड़कियां, 3 महिलाएं और एक लड़का शामिल था। एक मामले में 15 वर्षीय लड़के के साथ बंदूक की नोक पर मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप भी सामने आया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अपहरण के कई मामले पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365 के तहत दर्ज किए गए, जो बंधक बनाने से संबंधित है। इन मामलों में 64 पुरुष और 5 महिलाएं पीड़ित थीं।

एक अन्य घटना में, 4 मई को सेक्टर एफ-6/1 से एक व्यक्ति को अगवा कर लिया गया था, जिसका शव अगले दिन मर्दान में मिला।

पिछले महीने आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान में यौन हिंसा की घटनाएं कोई अलग-थलग मामला नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़े और गंभीर सामाजिक पैटर्न का हिस्सा हैं। इसमें यह भी बताया गया कि न्याय प्रणाली में कमजोरियां और सजा से बच निकलने की धारणा ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि देश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए मजबूत संस्थागत सुधारों की जरूरत है।