जबलपुर, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शुक्रवार को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों से कहा कि वे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराएं और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करें।
डिप्टी सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जबलपुर, मंडला और नरसिंहपुर जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बॉन्ड पर सेवा दे रहे डॉक्टरों से संवाद किया और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ चिकित्सा कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने डॉक्टरों से अपनी जिम्मेदारियों का संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करने की अपील की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, उनकी गुणवत्ता में सुधार और आम नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।”
उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, एनीमिया नियंत्रण, सिकल सेल रोग की पहचान और उपचार तथा गैर-संचारी रोगों से जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
राजेंद्र शुक्ला ने स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता की भी समीक्षा की और अधिकारियों को उनके नियमित उपस्थित रहने को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों को चिकित्सा सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े।
मंडला जिले की समीक्षा के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डी.जे. मोहंती ने बताया कि जिले में 67 बॉन्ड सेवा डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से 50 ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
उपमुख्यमंत्री ने बीजाडांडी ब्लॉक के जमथर गांव में पदस्थ डॉ. आशीष परास से बातचीत कर उनके कार्यस्थल पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों को प्रतिदिन सुबह 9 बजे से अपने निर्धारित ओपीडी कक्ष में उपस्थित रहने के निर्देश दिए।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने जबलपुर के मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. अंजू मरावी से भी बातचीत की और ओपीडी सेवाओं, टेलीमेडिसिन सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता तथा स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को डॉक्टरों के लिए आवास, भोजन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही अधिकारियों से डॉक्टरों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को कहा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण दिया जाना चाहिए, ताकि वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ सेवाएं प्रदान कर सकें।
उन्होंने ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों को स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में जबलपुर कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, सीएमएचओ नवीन कोठारी तथा अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।

