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मैसूरु दशहरा विवाद: मंत्रियों को रोकने के मामले की जांच के आदेश, सीएम ने मांगी रिपोर्ट

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बेंगलुरु, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात पुलिस अधीक्षक (एसपी) सी.बी. ऋष्यंत ने तीन मंत्रियों को 21 अक्टूबर को ‘जंबू सवारी’ जुलूस के दौरान नंदी ध्वज पूजा में शामिल होने से रोक दिया। इस घटना के बाद जनता दल (सेक्युलर) ने गुरुवार को कर्नाटक सरकार पर दलित मंत्रियों के अपमान का आरोप लगाया। साथ ही पार्टी ने सरकार के सामाजिक न्याय के दावों और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों का पालन करने की बातों पर भी सवाल उठाए हैं।

दरअसल, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक में एनडीए की सहयोगी पार्टी जेडी (एस) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में जेडी (एस) ने इस घटना की निंदा की और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह दलितों को केवल एक वोट बैंक मानती है और सत्ता में आने के बाद उन्हें अपमानित करती है।

जेडी (एस) ने आरोप लगाया, “कांग्रेस में दलित मंत्रियों के साथ ऐसा ही ‘शाही बर्ताव’ किया जाता है। दलितों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना और सत्ता में आने पर उन्हें अपमानित करना यही कांग्रेस की संस्कृति है।”

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सवाल करते हुए पार्टी ने पूछा कि उनके साथ आए मंत्रियों को मंच तक ले जाने के बजाय पीछे क्यों छोड़ दिया गया?

पार्टी ने पूछा, “अगर मंत्रियों के साथ ही ऐसा बर्ताव किया जा रहा है तो आपके शासन में आम लोगों का क्या हाल होगा? क्या यही आपका सामाजिक न्याय है? क्या यही आपकी ‘अंबेडकरवादी विचारधारा’ है? क्या उनके द्वारा लिखे गए संविधान में आपकी यही आस्था है?”

कांग्रेस पर धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का दावा करने के बावजूद ‘छुआछूत’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए जेडी (एस) ने कहा कि इस घटना से कर्नाटक की बदनामी हुई है।

पार्टी ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ कांग्रेस के पुराने बर्ताव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने डॉ. अंबेडकर का अपमान किया और इस दलित नेता को हाशिए पर धकेलने के लिए चार बार चुनावों में उन्हें हराया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 75 साल बाद भी कांग्रेस का रवैया वैसा ही बना हुआ है।

मैसूरु दशहरा उत्सव के दौरान देवी चामुंडेश्वरी की शोभायात्रा का जिक्र करते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि यह घटना दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी कि सरकार को अपने इन कार्यों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

पार्टी ने राज्य मंत्रिमंडल के सभी दलित मंत्रियों से आग्रह किया कि वे मुख्यमंत्री और इसमें शामिल अधिकारियों के इस कथित व्यवहार की निंदा करें।

जेडी (एस) ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के अधीन काम करना, जिसने उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाई है, खुद में ही अपमानजनक है। पार्टी ने मंत्रियों को चुनौती दी कि अगर उनके सम्मान को ठेस पहुंची है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

पार्टी ने राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे को भी निशाने पर लिया और उनसे पूछा कि दशहरा उत्सव के दौरान उनके विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार पर वे क्या जवाब देंगे।

जेडी (एस) ने गृह मंत्री से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा, “आप अपने अनुकूल मुद्दों पर तो जोर-शोर से बोलते हैं। इस मामले पर भी अपनी बात रखें।”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस घटना की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। बुधवार को मैसूर पैलेस परिसर में ‘नंदी ध्वज पूजा’ के दौरान पुलिस अधिकारियों ने मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया था।

कर्नाटक के सीएम ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने मंत्रियों, जिनमें शिवराज तंगदगी, पी.एम. नरेंद्र स्वामी और के.एस. बसवंथप्पा शामिल हैं, को अनुष्ठान स्थल में जाने से रोककर उद्दंडतापूर्ण व्यवहार किया।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, “मैंने तुरंत व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था कराई, लेकिन अधिकारियों का यह मनमाना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसलिए मैंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच करें और रिपोर्ट सौंपें।”