कलकत्ता हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग

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कोलकाता, 12 मई (आईएएनएस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

राज्य सरकार इस मामले के निपटारे के लिए एक न्यायिक आयोग गठित कर सकती है। न्याय के हित में, पीठ का मत था कि इस मामले की सुनवाई उसी पीठ द्वारा की जा सकती है, जो इस मुद्दे पर पर्याप्त समय दे सकती है।

गौरतलब है कि सीबीआई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।

पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति मंथा की पीठ ने कहा था कि यदि आवश्यक हुआ तो सीबीआई आरजी कर मामले में दोषी और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर सकती है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा था कि वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है। सीबीआई ने इसी आधार पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

मार्च 2025 में, न्यायमूर्ति देबांशु बासक की खंडपीठ ने पीड़ित परिवार की ओर से दायर मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। न्यायाधीश ने कहा था कि अदालत के पास इस मामले के लिए समय नहीं है। परिवार ने मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन किया था, लेकिन अदालत में उन्हें पूरी सुनवाई नहीं मिल पाई। समय की कमी के कारण, न्यायमूर्ति बासक की खंडपीठ ने मामले को स्थगित करने का निर्णय लिया।

महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त, 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से बरामद किया गया था। घटना के अगले दिन, कोलकाता पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली। 18 जनवरी, 2025 को सियालदह अदालत ने आरजी कार मामले में फैसला सुनाया। रॉय को दोषी पाया गया और सजा सुनाई गई।

न्यायाधीश अनिर्बन दास ने 20 जनवरी, 2025 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन सियालदह अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने से पहले ही पीड़ित के माता-पिता ने उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर कर दिया। यह आवेदन उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ के समक्ष दायर किया गया था, जिसमें सीबीआई जांच से संबंधित कई सवाल उठाए गए थे। न्यायमूर्ति घोष ने पीड़ित परिवार की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया क्योंकि आरजी कर मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में भी चल रही थी।

इसके बाद पीड़ित के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में वही याचिका दायर की। इस पर सुनवाई भी हुई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया कि वही याचिका सुप्रीम कोर्ट में क्यों सुनी जा रही है और कहा कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट करेगा। तब से उस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है।