Friday, August 7, 2026
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कर्नाटक भाजपा ने ‘नेशनल हैंडलूम डे’ मनाया, पीएम मोदी सरकार को दिया श्रेय

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बेंगलुरु, 7 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा ने शुक्रवार को बेंगलुरु में अपने राज्य मुख्यालय, जगन्नाथ भवन में ‘नेशनल हैंडलूम डे’ मनाया। इस मौके पर पार्टी नेताओं ने पेशेवर बुनकरों को सम्मानित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की उन पहलों पर जोर दिया जिनका मकसद बुनकर समुदाय को सशक्त बनाना है।

सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई. विजयेंद्र ने कहा कि केंद्र ने कई कल्याणकारी योजनाओं के जरिए बुनकरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कर्नाटक में भाजपा दोबारा सत्ता में आती है, तो वह हैंडलूम सेक्टर के लिए और भी कार्यक्रम शुरू करेगी।

कार्यक्रम में बोलते हुए विजयेंद्र ने कहा कि तमाम दावों के बावजूद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में अगली सरकार भाजपा ही बनाएगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा निश्चित रूप से सत्ता में लौटेगी। हमारी सरकार बुनकरों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनाएगी और हैंडलूम सेक्टर को बेहतर सहयोग सुनिश्चित करेगी।

विजयेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कौशल विकास, बाजार के विस्तार और रोजगार के अवसर पैदा करके हैंडलूम और टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं।

उन्होंने टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए केंद्र की बड़ी पहलों में से एक के तौर पर पीएम मित्र पार्क्स स्कीम का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनाई सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक कला है जिसे बचाए रखने और बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, केंद्र ने ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ घोषित करके बुनकरों के योगदान को मान्यता दी है और पारंपरिक हुनर ​​को बचाने के लिए लगातार काम किया है।

कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए विजयेन्द्र ने कहा कि बुनकर समुदाय की भलाई के लिए कई कदम उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार हथकरघा कामगारों को जरूरी मदद देने में नाकाम रही है।

उत्तरी कर्नाटक के अपने दौरों का जिक्र करते हुए विजयेन्द्र ने कहा कि उन्होंने बुनकर परिवारों की मुश्किलों को खुद देखा है। उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा अक्सर किसानों और बुनकरों को समाज की ‘दो आंखें’ बताते थे और उन्होंने दोनों समुदायों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किए थे।