कोच्चि/कलपेट्टा, 10 जुलाई (आईएएनएस)। वायनाड में हुए भूस्खलन में शुक्रवार को एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। इस संबंध में केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पीड़ितों के परिवारों को तत्काल अनुग्रह राशि का वितरण करे, घायलों को मुफ्त उपचार प्रदान करे और मृतकों के शवों को बिना किसी देरी के उनके परिजनों को सौंपे।
एक व्यक्ति अभी भी लापता है, बचाव दल कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास दुर्घटनास्थल पर गहन तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं, जहां वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने वाली अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पडी सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा था। यहां पर 7 जुलाई को भीषण भूस्खलन हुआ था।
शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नाम्बियार और न्यायमूर्ति एके प्रीता की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दायित्व के प्रश्नों पर राहत उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद उनके पैतृक स्थानों पर ले जाने के लिए संरक्षित किए जाने की सूचना मिलने पर पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि शवों को उनके परिवारों को सौंपने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए ताकि अंतिम संस्कार अनावश्यक कठिनाई के बिना संपन्न किया जा सके।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि घायलों के इलाज और अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित सभी खर्च, जिनमें उनकी सहायता करने वाले की जरूरतें भी शामिल हैं, फिलहाल राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएं।
पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल से छुट्टी मिलने तक किसी भी प्रकार के भुगतान पर जोर दिए बिना उपचार और आगे कहा कि व्यय को शुरू में परियोजना पर प्रभार के रूप में माना जा सकता है, जबकि अंततः जिम्मेदार पाए जाने वालों से राशि की वसूली का मुद्दा बाद में तय किया जाएगा।
पीठ ने आगे निर्देश दिया कि मृतकों और घायलों के परिवारों के लिए सरकार द्वारा घोषित अनुग्रह राशि का तत्काल वितरण किया जाए और राज्य से अगले सप्ताह तक एक नई स्थिति रिपोर्ट मांगी जाए।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने अदालत को सूचित किया कि खुदाई करने वाली मशीनों और अन्य भारी मशीनों के साथ बचाव अभियान जारी है। हालांकि अस्थिर भूभाग और कीचड़ भरी स्थितियों के कारण अंतिम चरणों में व्यापक स्तर पर मैन्युअल खोज अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ी है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की साप्ताहिक आधार पर निगरानी करना जारी रखेगा, जिसमें मुआवजे के शीघ्र भुगतान और पुनर्वास उपायों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
ये निर्देश 2024 में वायनाड में हुए भूस्खलन के बाद अदालत द्वारा शुरू की गई स्वतः संज्ञान कार्यवाही के हिस्से के रूप में आए हैं।
अब पीठ ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इसमें नवीनतम सुरंग परियोजना त्रासदी को भी शामिल कर लिया है, जो बचाव प्रयासों और आपदा के कारणों दोनों पर गहन न्यायिक निगरानी का संकेत देता है।

