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केरल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी थाचनकारी को लगाई फटकार, जमानत रद्द करने की दी चेतावनी

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कोच्चि, 6 नवंबर (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचनकारी को कड़ी फटकार लगाई। थाचनकारी ने अपनी हिरासत की पूरी अवधि जेल अस्पताल में बिताने के बाद, विदेश जाकर नौकरी करने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि उनकी जमानत रद्द भी की जा सकती है।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने इस अर्जी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि सितंबर में आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, थाचनकारी ने जेल में एक दिन भी नहीं बिताया है। कोर्ट ने पूजापुरा सेंट्रल जेल के अधीक्षक द्वारा पहले दिए गए निर्देश के तहत जमा किए गए उनके मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की। रिकॉर्ड से पता चला कि हिरासत के दौरान बिताए गए पूरे चार सप्ताह वे अस्पताल में ही रहे।

जज ने टिप्पणी की, “उन्हें भर्ती होने की तारीख से लेकर रिहाई की तारीख तक अस्पताल में रखा गया। वे एक दिन भी जेल में नहीं रहे। आराम से अस्पताल में रहे। वहां उन्हें 1,000 बीमारियां थीं, और अब कोई बीमारी नहीं है! अब वे दुबई जाकर नौकरी करना चाहते हैं। यह कैसे हो सकता है? कोर्ट के सामने झूठ न बोलें।”

कोर्ट ने सवाल किया कि जो व्यक्ति हिरासत के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दे रहा था, वह अब विदेश में नौकरी करने के लिए खुद को पूरी तरह फिट कैसे बता सकता है? कोर्ट ने कहा, “जब वे जेल जाते हैं, तो जेल में रहने के बजाय अस्पताल में जाकर लेट जाते हैं। और जैसे ही बाहर आते हैं, एकदम स्वस्थ हो जाते हैं! ऐसा नहीं हो सकता।”

जज ने यह भी चेतावनी दी कि कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने पर विचार कर सकता है, क्योंकि इस तरह के व्यवहार को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

कोट्टायम विजिलेंस कोर्ट ने 17 सितंबर को थाचनकारी को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और 30.84 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उन्हें 2003 से 2007 के बीच अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति जमा करने का दोषी पाया गया था। यह संपत्ति 30.84 लाख रुपये की थी, जो उनकी ज्ञात आय का 52.33 प्रतिशत थी। वे केरल के पहले ऐसे पूर्व पुलिस अधिकारी (डीजीपी रैंक के) थे, जिन्हें किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था।

हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर को उनकी अपील का निपटारा होने तक उनकी सजा पर रोक लगा दी और उन्हें जमानत दे दी। इसके बाद, उन्होंने रोजगार के सिलसिले में विदेश जाने के लिए अपनी जमानत की शर्तों में ढील दिए जाने की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।