बेंगलुरु, 29 सितंबर (आईएएनएस)। बेंगलुरु की चौथी सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (केपीएससी) में वेटनरी अधिकारियों की भर्ती से जुड़े कथित घोटाले के मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कस्टडी में भेज दिया।
ईडी अधिकारियों ने कन्नले को कोर्ट में पेश किया और आगे की पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी मांगी। कोर्ट ने इस अपील को मंजूरी देते हुए आदेश दिया कि आगे की जांच के लिए कन्नले को 14 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेजा जाए।
सस्पेंड किए गए आईएएस अधिकारी और केपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार, जिन्हें सीआईडी ने गिरफ्तार किया था, वे भी अभी ईडी की कस्टडी में हैं।
खबरों के मुताबिक, गंगवार ने माना है कि उन्होंने परीक्षा से एक दिन पहले वेटनरी ऑफिसर का एग्जाम पेपर कन्नले को लीक किया था। यह मामला इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अवैध भर्तियों को लेकर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधा है। इसके साथ ही भाजपा नेताओं का दावा है कि इस घोटाले के सिलसिले में कई मंत्रियों को जेल हो सकती है।
केपीएससी भर्ती घोटाला अब कई एजेंसियों की जांच का मामला बन गया है, जिसमें हाई कोर्ट द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी), सीआईडी और ईडी शामिल हैं।
21 सितंबर 2026 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने केपीएससी भर्तियों में हेरफेर को “संविधान के साथ धोखाधड़ी” करार दिया और नए सिरे से जांच का आदेश देते हुए डीजीपी आलोक कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली एसआईटी का गठन किया। एसआईटी को अपनी जांच पूरी करने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 100 दिन का समय दिया गया है।
जांच में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का पता चला है। खबरों के मुताबिक, कन्नले ने उम्मीदवारों से 12 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम वसूली थी, जिसमें हर पोस्ट के लिए 70 लाख से 90 लाख रुपए लिए गए थे।
कागजात से पता चला कि गंगवार को सीधे 1.3 करोड़ रुपए नकद दिए गए थे। इसके साथ ही महंगी ज्वेलरी, जिसमें 23 लाख रुपए का डायमंड नेकलेस शामिल है, और अधिकारी व उनके एक दोस्त के लिए 65 फ्लाइट टिकट का खर्च भी उठाया गया था। जांच में एक बेनामी बैंक अकाउंट का भी पता चला, जिसमें 1.86 करोड़ रुपए जमा थे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार केपीएससी को बंद करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। उन्होंने कहा कि “वहां चोर बैठे हैं” और अवैध गतिविधियों ने कमीशन की साख को नुकसान पहुंचाया है।
विपक्षी पार्टियों ने इस संस्था को ‘कर्नाटक प्राइवेट कमीशन’ का नाम दिया है और जवाबदेही की मांग की है। वहीं, सीएम शिवकुमार ने यह भी कहा कि राज्य सरकार एसआईटी के गठन के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी, क्योंकि इसे वे दखलंदाजी मानते हैं।
