केरल में फिर शुरू हुई लोड शेडिंग, रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच सरकार ने लिया फैसला

0
11

तिरुवनंतपुरम, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली मांग बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मंगलवार से फिर लोड शेडिंग लागू करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हालिया विधानसभा चुनाव प्रचार में सत्तारूढ़ वाम सरकार ने करीब एक दशक तक राज्य को लोड शेडिंग मुक्त रखने का दावा किया था।

ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (पावर) पुनीत कुमार ने बिगड़ती बिजली स्थिति का जायजा लिया और ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच अधिकतम 30 मिनट तक बिजली कटौती की अनुमति दी।

बैठक में केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मिन्हाज आलम समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण बिजली मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

बैठक में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 27 अप्रैल को बिजली खपत 118.26 मिलियन यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, शाम 6 बजे के बाद मांग 6,033 मेगावाट दर्ज की गई। इससे पहले, 23 अप्रैल की रात 10:30 बजे 6,195 मेगावाट की अस्थायी उच्च मांग दर्ज की गई थी।

अधिकारियों के अनुसार तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था, लेकिन यह बढ़कर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे बिजली खपत तेजी से बढ़ी।

राज्य सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय बिजली बाजार में भी हीटवेव के कारण उपलब्धता घटी है, जिससे केरल की परेशानी बढ़ी है। केरल अपनी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली जरूरत बाहरी स्रोतों से पूरी करता है। हालांकि केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों से 200 मेगावाट की कमी जल्द दूर होने की उम्मीद है।

बिजली की मांग बढ़ने के पीछे एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल, शाम के समय इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और गैस संकट के कारण इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ता रुझान प्रमुख वजहें बताई गई हैं। रात 9:30 बजे से मध्यरात्रि तक मांग सबसे ज्यादा देखी गई।

इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया है कि सरकार के गलत और अपारदर्शी बिजली खरीद समझौतों ने राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर किया है।

केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने लोगों से अपील की है कि पीक आवर्स में ईवी चार्जिंग से बचें, एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें और ज्यादा बिजली खपत वाले उपकरणों का सीमित उपयोग करें।

अब सरकार के सामने बिजली संकट संभालने के साथ-साथ राजनीतिक चुनौती भी खड़ी हो गई है, क्योंकि 4 मई को विधानसभा चुनावों की मतगणना होनी है।