लखनऊ, 18 मई (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद, लखनऊ में जिला कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों के अवैध चैंबर और दुकानों को तोड़े जाने के एक दिन बाद, सोमवार को तनाव और बढ़ गया।
बार एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रशासन पर विरोध कर रहे वकीलों पर बेरहमी से लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया।
रविवार को लखनऊ नगर निगम द्वारा भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ चलाए गए इस तोड़फोड़ अभियान का वकीलों ने जोरदार विरोध किया था, जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़पें हुईं और तीखी बहस हुई।
सोमवार को बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई वकील घायल हो गए। उन्होंने प्रशासन की इस बात के लिए निंदा की कि उसने वकीलों को तोड़फोड़ से पहले अपने चैंबर से सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया।
यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था, और हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। पिछले ढाई-तीन महीनों से हम इसके लागू होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, हम अपने सम्मानित सदस्यों के खिलाफ प्रशासन द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हैं।
उन्होंने दावा किया कि वकीलों को अपने चैंबर से जरूरी चीजें निकालने से रोका गया।
उन्होंने कहा कि हम इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि प्रशासन ने हमारे सम्मानित वकीलों को उनके चैंबर के अंदर रखे लैपटॉप, एयर-कंडीशनर, फर्नीचर और कई जरूरी फाइलें हटाने का मौका भी नहीं दिया।
यादव ने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने बल का प्रयोग किया, जिससे कई वकील घायल हो गए।
उन्होंने आरोप लगाया, “पुलिस ने इतना जबरदस्त लाठीचार्ज किया कि हमारे कई वकील घायल हो गए, कुछ को फ्रैक्चर भी हो गया, और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।”
उन्होंने कहा कि वकील हाई कोर्ट के निर्देशों का विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि जिस तरीके से तोड़फोड़ की गई, उस पर आपत्ति जता रहे थे।
उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज का कोई आदेश नहीं था। कोर्ट ने सिर्फ तोड़फोड़ का आदेश दिया था। ऐसा नहीं है कि हम कोर्ट का सम्मान नहीं करते; पूरा देश न्यायपालिका का सम्मान करता है, और हम भी करते हैं। हालांकि, हम अपने सम्मानित सदस्यों के खिलाफ प्रशासन द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हैं। मैं इस घटना की निंदा करता हूं।

