Saturday, June 6, 2026
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तमिलनाडु: 12 जून को मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की संभावना कम, जल भंडारण 50 प्रतिशत से नीचे

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चेन्नई, 6 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में खरीफ सीजन की कुरुवई धान फसल के लिए हर साल 12 जून को मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की परंपरा इस बार टूट सकती है। बांध में जल भंडारण क्षमता के आधे से भी कम रहने के कारण निर्धारित तिथि पर पानी छोड़े जाने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

12 जून को प्रस्तावित जल छोड़ने की तारीख में अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है, लेकिन कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। किसान कुरुवई फसल की बुवाई शुरू करने के लिए हर साल मेट्टूर बांध से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अब समय पर पानी छोड़े जाने की संभावना कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों में होने वाली अच्छी बारिश और उससे बांध में बढ़ने वाले जल प्रवाह पर निर्भर करेगी।

गुरुवार तक मेट्टूर बांध का जलस्तर 79.86 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसमें 41.81 टीएमसी (हजार मिलियन घन फीट) पानी मौजूद था। यह बांध की कुल 93.45 टीएमसी क्षमता के 50 प्रतिशत से भी कम है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा जल भंडारण 12 जून से पानी छोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि मौसम में उल्लेखनीय सुधार न हो।

मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने का तमिलनाडु की कृषि व्यवस्था में विशेष महत्व है। इस पानी से राज्य के 12 जिलों- सेलम, इरोड, नमक्कल, करूर, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम, पुडुकोट्टई, कुड्डालोर, मयिलादुथुरै और पेरम्बलूर के लगभग 16 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र की सिंचाई होती है।

यह पानी विशेष रूप से कुरुवई, सांबा और थलाडी धान फसलों की खेती के लिए आवश्यक होता है। यदि पानी छोड़ने में देरी होती है, तो खासकर कम अवधि वाली कुरुवई फसल की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने का समय जल भंडारण और जल प्रवाह की स्थिति के अनुसार बदलता रहा है। वर्ष 2022 में पर्याप्त जल उपलब्ध होने के कारण मई में ही पानी छोड़ दिया गया था, जबकि कम जल भंडारण के चलते 2024 में इसे जुलाई तक टालना पड़ा था। अन्य वर्षों में परंपरागत 12 जून की तारीख का पालन किया गया।

दक्षिण-पश्चिम मानसून के धीरे-धीरे आगे बढ़ने और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना के बीच कावेरी डेल्टा के किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में बांध में पानी की आवक बढ़ेगी।

अधिकारियों ने बताया कि जल भंडारण, वर्षा की स्थिति और जल प्रवाह की समीक्षा के बाद ही राज्य सरकार मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने पर अंतिम फैसला लेगी।