मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एमपीएससी पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच के लिए गवर्नर से मंजूरी मांगी है।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सोमवार को औपचारिक रूप से गवर्नर जिष्णु देव वर्मा से सिफारिश की कि वे संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के मौजूदा और पूर्व सदस्यों और अध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करें।
मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव दिया कि हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली कमेटी इन आरोपों की जांच करे और आगे की कार्रवाई तय करने के लिए तीन महीने के अंदर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।
सीएम ने बताया कि एमपीएससी के उन अधिकारियों को हटाने के लिए एक सख्त प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है, जो संवैधानिक पदों पर हैं। अनुच्छेद 317 के तहत, उन्हें तभी हटाया जा सकता है जब एक औपचारिक जांच हो और उसके बाद भारत के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी वाली कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री और छात्र प्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत में मिले आश्वासन के बाद एमपीएससी के सचिव महेंद्र हरपालकर को आधिकारिक तौर पर उनके पद से हटा दिया गया है।
एमपीएससी द्वारा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के लिए आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद पुणे में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
जांच से पता चला कि तीन उम्मीदवारों को पेपर लीक से सीधे तौर पर फायदा हुआ था। इन तीनों उम्मीदवारों और कई साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में उम्मीदवार पुणे में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमन्वार के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने 2026 की शुरुआत में पद संभाला था। ये प्रदर्शन परीक्षा के पैटर्न, खासकर मल्टीपल-चॉइस सवालों और डिस्क्रिप्टिव फॉर्मेट के मुद्दे, और साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही जैसे बड़े सवालों को लेकर छात्रों की चिंताएं भी दिखाते हैं।
छात्र एमपीएससी चेयरमैन के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और विपक्षी पार्टियां इस विरोध प्रदर्शन को पूरा समर्थन दे रही हैं। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से गवर्नर जिष्णु देव वर्मा को की गई औपचारिक सिफारिश के साथ इस आंदोलन में एक बड़ी कामयाबी मिली है।
इस बीच, एमपीएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवादों के बीच शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने रविवार को अपनी ही सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना की।
एमपीएससी बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने मांग की कि बोर्ड को ही भंग कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने सबूत और एक औपचारिक पत्र सीधे मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।
राज्य सरकार के हालिया कदमों का मकसद आयोग के प्रशासनिक कामकाज की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र न्यायिक जांच करवाकर उम्मीदवारों का भरोसा फिर से कायम करना है।
