हैदराबाद, 24 सितंबर (आईएएनएस)। दानम नागेंद्र ने गुरुवार को कहा कि वह दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा की सदस्यता से उन्हें अयोग्य ठहराने के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि वह उपचुनाव जीतेंगे।
उन्होंने मीडिया से कहा कि 2024 के चुनाव में सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते समय ही उन्हें इस तरह के फैसले की आशंका थी।
नागेंद्र 2023 में हैदराबाद की खैरताबाद विधानसभा सीट से बीआरएस के टिकट पर विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में वह सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के साथ चले गए। उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई लड़ने में कुछ भी गलत नहीं है।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत राहत मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
नागेंद्र ने दावा किया कि उन्हें जनता का समर्थन हासिल है और खैरताबाद उनका गढ़ है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह उपचुनाव में जीत हासिल करेंगे।
पूर्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने पर फैसला करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं खैरताबाद से तीन बार विधायक चुना गया हूं। मैं एक उपचुनाव सिर्फ 1,600 वोटों से हारा था।”
नागेंद्र ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नागेंद्र को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज किया गया था। हाई कोर्ट ने नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला।
18 सितंबर को सुनाए गए फैसले में मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जीएम मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने कहा था कि नागेंद्र संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) और अनुच्छेद 191(2) के तहत अयोग्य हो गए थे। बीआरएस विधायक के रूप में चुने जाने के बावजूद उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।
हाईकोर्ट ने खैरताबाद विधानसभा सीट को भी खाली घोषित कर दिया था और अपने आदेश की एक प्रति तेलंगाना विधानसभा के सचिव तथा भारत निर्वाचन आयोग को भेजने का निर्देश दिया था।
यह फैसला भाजपा विधायक दल के नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी और बीआरएस विधायक पाडी कौशिक रेड्डी की याचिकाओं पर आया था। दोनों ने विधानसभा अध्यक्ष के 11 मार्च 2026 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें नागेंद्र को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज किया गया कि नागेंद्र दिसंबर 2023 में खैरताबाद से बीआरएस विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया और बीआरएस उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया।
नागेंद्र उन 10 बीआरएस विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 2024 में सत्तारूढ़ कांग्रेस का साथ दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने सभी 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की बीआरएस की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद बीआरएस विधायकों ने 10 में से नौ विधायकों के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं।
