नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। दक्षिण दिल्ली के हौज खास में एसी ब्लास्ट के बाद लगी आग में पूर्व आईएएस अधिकारी धनेन्द्र कुमार की मौत हो गई। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के पहले अध्यक्ष धनेन्द्र कुमार की मौत के मामले में शुक्रवार को एक पड़ोसी ने आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड घटना की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची।
आईएएनएस से बात करते हुए पड़ोसी रमेश ने कहा कि फायर ब्रिगेड के देर से पहुंचने की वजह से स्थिति और खराब हो गई। जब मैं सुबह आया तो मुझे उनकी मौत के बारे में पता चला। आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। फायर ब्रिगेड बहुत देर से पहुंची। अगर वे समय पर आ जाते तो शायद यह हादसा नहीं होता।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जब स्थानीय लोगों ने देरी पर सवाल उठाए तो फायर अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पता ढूंढने में देर लगी।
रमेश ने कहा, ”आग रात में लगी थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आसानी से पहुंच सकती थीं, लेकिन पता नहीं क्यों वे देर से पहुंचे। वे करीब एक घंटे बाद आए।”
उन्होंने यह भी बताया कि घटना के समय घर में कुमार के बेटे, बेटी और कुछ घरेलू कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि धनेन्द्र कुमार की पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, वह व्हीलचेयर पर हैं।
रमेश ने कहा, ”जब लोगों ने अंदर जाकर अन्य लोगों को बचाने की कोशिश की, तो धुएं की वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।”
इस बीच, दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह घटना गुरुवार रात करीब 11:18 बजे दक्षिण दिल्ली के हौज खास इलाके में स्थित उनके आवास पर हुई। आग लगने के समय घर में परिवार के सदस्य और घरेलू कर्मचारी सहित कुल पांच लोग मौजूद थे।
सूचना मिलते ही पुलिस और दिल्ली फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया गया। फायरकर्मियों ने अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला और आग पर काबू पाया।
अधिकारियों ने बताया कि 80 वर्षीय पूर्व आईएएस अधिकारी और उनके बेटे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान धनेन्द्र कुमार की मौत हो गई। उनका बेटा खतरे से बाहर है और इलाज जारी है।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आग संभवतः घर में लगे एयर कंडीशनर की इनडोर यूनिट में हुए धमाके के बाद लगी। अधिकारियों ने अब तक किसी साजिश से इनकार किया है।
धनेन्द्र कुमार अपने लंबे और प्रतिष्ठित प्रशासनिक करियर के लिए जाने जाते थे। वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी थे और उन्होंने केंद्र सरकार तथा हरियाणा प्रशासन में कई अहम पदों पर काम किया था।
उन्होंने रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय सहित कई केंद्रीय मंत्रालयों में वरिष्ठ पद संभाले। रक्षा मंत्रालय में उन्होंने प्रशासनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्य देखे, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय में उन्होंने बुनियादी ढांचे और राजमार्ग विकास में योगदान दिया।

