नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले को लेकर शनिवार को एक औद्योगिक संगठन ने चिंता जाहिर की। संगठन ने कहा कि अमेरिकी सीनेट ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को रूसी ऊर्जा के शीर्ष आयातकों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इससे भारत से इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, बिल को अभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी है, लेकिन ईईपीसी इंडिया के एक बयान में चेतावनी दी गई है कि अगर यह कदम कानून बन जाता है तो इसके नतीजे हो सकते हैं।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, “यह हमारे लिए वाकई चिंता की बात है, क्योंकि अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग सामानों का टॉप मार्केट है। बिल को अभी लेजिस्लेटिव प्रोसेस पूरा करना बाकी है, लेकिन यह हमारे लिए सच में चिंता की बात है, क्योंकि कोई भी अतिरिक्त लेवी भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर देगी।”
चड्ढा ने कहा, “लिंड्से ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम का यह बिल, अगर अमेरिकी कांग्रेस से मंजूर हो जाता है और कानून बन जाता है, तो इंडियन गुड्स एक्सपोर्ट पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी इसके किसी भी संभावित असर पर बात करना जल्दबाजी होगी।”
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका को भारत से इंजीनियरिंग सामान का निर्यात सकारात्मक रहा है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में नए टैरिफ लगा दिए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर शिपमेंट पर कोई भी अतिरिक्त लेवी लगती है तो भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है।
अमेरिका को भारतीय इंजीनियरिंग सामान का एक्सपोर्ट 19.60 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें साल-दर-साल 2.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अमेरिकी सीनेट ने एक रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया, जिसमें भारत का नाम नहीं है, लेकिन यह उसे और रूसी ऊर्जा के दूसरे बड़े खरीदारों को 100 फीसदी तक के टैरिफ के दायरे में ला सकता है।
सीनेट से 86-11 वोट से पास हुआ लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा, जहां सीनियर डेमोक्रेट्स ने इसके टैरिफ प्रोविजन पर आपत्ति जताई है।
इस कानून के तहत सरकार को ट्रेड डेटा का इस्तेमाल करके देशों की पहचान करनी होगी, न कि कानून में उनका नाम लिखना होगा। इसमें रूसी क्रूड ऑयल के पांच सबसे बड़े इंपोर्टर, रूसी प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े इंपोर्टर और रूसी तेल प्रतिबंध से बचने में मदद करने वाले पांच बड़े देश शामिल हैं।
ये फैसले सबसे हाल के 12 महीने के समय पर आधारित होंगे और हर 180 दिन में उनका रिव्यू किया जाएगा।

