नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आगामी भारत की जनगणना में ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमेन’ और ‘ट्रांसविमेन’ जैसी अलग श्रेणियों को शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग ने मंगलवार को जारी अपने ‘एडवाइजरी 2.0’ में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं।
एनएचआरसी ने कहा कि ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के उत्तराधिकार, संपत्ति, आवास और पारिवारिक अधिकार दिए जाने चाहिए। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर ट्रांसजेंडर छात्रों को प्रवेश देने की भी सिफारिश की गई है।
आयोग ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों समेत कई कानूनों की समीक्षा करने की जरूरत बताई है, ताकि स्व-पहचाने गए जेंडर को कानूनी मान्यता मिल सके और ट्रांसजेंडर व इंटरसेक्स व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
यह एडवाइजरी 11 मंत्रालयों, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय और सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों/प्रशासकों को भेजी गई है। आयोग ने सभी संबंधित विभागों से दो महीने के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) सौंपने को कहा है।
एडवाइजरी जिन मंत्रालयों को भेजी गई है, उनमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, गृह, कानून एवं न्याय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, कॉरपोरेट कार्य, श्रम एवं रोजगार, आवास एवं शहरी कार्य तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय शामिल हैं।
एनएचआरसी ने कहा कि 15 सितंबर 2023 को जारी पिछली एडवाइजरी पर संबंधित विभागों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और सहयोग उत्साहजनक रहा है। आयोग ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों, खासकर ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उससे जुड़ी योजनाओं की भी सराहना की।
हालांकि आयोग ने अपने फील्ड इंटरैक्शन, हितधारकों से बातचीत और योजनाओं की समीक्षा के आधार पर पाया कि ट्रांसजेंडर समुदाय अब भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी को देखते हुए आयोग ने उनके कल्याण के लिए नई सिफारिशें जारी की हैं।
एडवाइजरी में 10 प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें राष्ट्रीय डाटा प्रणाली में जेंडर विविधता को शामिल करना, कानूनों और नीतियों को जेंडर समावेशी बनाना, संपत्ति का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच, कार्यस्थलों पर समावेशिता, विविध जेंडर पहचान वाले बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की देखभाल और ‘गरिमा गृह’ आश्रय केंद्रों को मजबूत करना शामिल है।

