नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने रामसर साइट्स के मामले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को देश की 100वीं रामसर साइट घोषित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह वेटलैंड पक्षियों की विविधता से समृद्ध है और यहां बड़ी संख्या में प्रवासी तथा स्थानीय पक्षी आते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “रामसर साइट्स के मामले में शतक। खुशी है कि उत्तर प्रदेश के बलिया में जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को भारत की 100वीं रामसर साइट घोषित किया गया है। यह वेटलैंड पक्षियों की विविधता से समृद्ध है और यहां कई प्रवासी और स्थानीय पक्षी आते हैं।”
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में वेटलैंड्स और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारे प्राकृतिक परिवेश और खासकर वेटलैंड्स की सुरक्षा के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता इस उपलब्धि में साफ तौर पर दिखाई देती है। पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा सामुदायिक भागीदारी, विज्ञान, इनोवेशन और जागरूकता अभियानों के जरिए वेटलैंड्स को बचाने और उन्हें फिर से जीवंत करने की कोशिशें मजबूत हुई हैं। ये प्रयास जैव-विविधता को बचाने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य बनाने में मदद कर रहे हैं।”
इससे पहले विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ के सिद्धांत तथा ‘मिशन लाइफ’ की भावना से प्रेरित होकर स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पृथ्वी की रक्षा के लिए लोगों को प्रेरित करने का अवसर प्रदान करता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के नेतृत्व में यह पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के सबसे बड़े वैश्विक अभियानों में से एक बन चुका है।
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित ‘यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन द ह्यूमन एनवायरनमेंट’ से हुई थी। इस सम्मेलन ने वैश्विक नीति-निर्माण में पर्यावरण संबंधी मुद्दों को प्रमुखता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित किया और इसे पहली बार 1973 में मनाया गया।
यह दिवस जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव-विविधता के नुकसान और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी वैश्विक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह लोगों, समुदायों, व्यवसायों और सरकारों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
समय के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 150 से अधिक देशों की भागीदारी वाला वैश्विक आंदोलन बन गया है। इसके तहत दुनिया भर में वृक्षारोपण अभियान, समुद्र तटों की सफाई, शैक्षिक कार्यक्रम और नीतिगत पहल जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। हर वर्ष एक मेजबान देश चुना जाता है और एक विशेष थीम के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
हालांकि पर्यावरण संरक्षण में सरकारों और संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किए गए प्रयास भी उतने ही आवश्यक हैं। कचरा कम करना, पानी बचाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, पेड़ लगाना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना जैसे छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

