चेन्नई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। चेन्नई में एक 27 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर महिला ने पुलिस से शिकायत की है कि निजी फर्टिलिटी क्लिनिक में जन्मे उसके बेटे को एक दंपति के पास दे दिया गया था, जो अब बच्चे को वापस लौटाने से इनकार कर रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने क्लिनिक के डॉक्टर और तिरुवोत्तियूर के एक दंपति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा दंपति के पास कैसे पहुंचा और क्या यह व्यवस्था सिर्फ अस्थायी थी।
चेंगलपट्टू की रहने वाली के. मेगला ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने अपने नवजात बेटे की देखभाल के लिए उसे तीन महीने के लिए उस दंपति के पास रखा था। अब उनका आरोप है कि दंपति बच्चा लौटाने को तैयार नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है, हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके बयानों में कुछ विरोधाभास थे, जिनकी और जांच की जरूरत है।
पुलिस के मुताबिक, मेगला का एक चार साल का बेटा पहले से ही था और फरवरी 2025 में प्राकृतिक कारणों से उसके पति की मौत हो गई थी। उस समय वह अपने दूसरे बच्चे के साथ तीन महीने की गर्भवती थी और आर्थिक तंगी से जूझ रही थी।
अपनी शिकायत में मेगला ने बताया कि उसे सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन दिखा, जिसमें कोलाथुर के एक अस्पताल में मुफ्त इलाज की पेशकश की गई थी। वह अपनी गर्भावस्था के सातवें महीने में उस अस्पताल गई और डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों को अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताया।
29 जुलाई 2025 को उसने अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। मेगाला का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने शुरू में उनसे कहा था कि नवजात शिशु को आइसोलेशन में रखने की जरूरत है। उनके अनुसार, डिलीवरी के 10 दिन बाद ही उन्हें बच्चा दिखाया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि एक दूसरे डॉक्टर ने उन्हें तिरुवोत्तियूर के एक ऐसे जोड़े से मिलवाया जिनकी कोई संतान नहीं थी और सुझाव दिया कि वे बच्चे को तीन महीने तक अपने पास रखें और फिर उसे उन्हें वापस कर दें। मेगला ने कहा कि वह इस अस्थायी व्यवस्था के लिए सहमत हो गईं।
उनकी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे को उस जोड़े को सौंप दिया। हालांकि, जब उन्होंने हाल ही में उनसे संपर्क किया और अपने बेटे को वापस मांगा, तो उस जोड़े ने मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।
