जयपुर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और कथित अनियमितताओं, खासकर नीट से जुड़े विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। नियुक्ति समिति ने राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की विश्वसनीयता को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और व्यापक सुधारों की मांग की है।
उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में गंगवार से देश की परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, हालिया परीक्षा विवादों से प्रभावित छात्रों का भरोसा बहाल करना और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना शामिल हो सकता है।
केंद्र सरकार का यह फैसला परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत करने और सुधारों की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नरेश पाल गंगवार राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनके पास करीब तीन दशक का प्रशासनिक अनुभव है।
अपनी नई नियुक्ति से पहले वह मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव के पद पर कार्यरत थे।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने से पहले गंगवार ने राजस्थान में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। वह राज्य के कई जिलों में जिला कलेक्टर रहे और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव सहित कई अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।
उन्हें वर्ष 2010 से 2014 के बीच जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के शुरुआती चरण में राजस्थान की सौर नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय भी दिया जाता है।
इसके अलावा, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नीतियों के निर्माण में भी योगदान दिया।
नरेश पाल गंगवार का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी बेहद मजबूत है। उन्होंने तत्कालीन यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (अब आईआईटी रुड़की) से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक.,आईआईटी दिल्ली से कम्युनिकेशन एवं रडार इंजीनियरिंग में एम.टेक. तथा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से अर्थशास्त्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब शिक्षा मंत्रालय देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक पर रोक लगाने, परीक्षा सुरक्षा को और मजबूत करने तथा संस्थागत सुधारों के जरिए छात्रों और आम जनता का भरोसा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

