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निकाय चुनाव में हार के बाद विश्वेंद्र सिंह ने राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व पर साधा निशाना

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जयपुर, 30 सितंबर (आईएएनएस)। शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी तनाव सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग में कांग्रेस संगठन के कामकाज और प्रदेश नेतृत्व पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं।

विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?’ शीर्षक से एक तीखा पोस्ट किया। इसमें उन्होंने पार्टी के स्थानीय संगठन की आलोचना करते हुए भरतपुर और डीग के जिला अध्यक्षों के साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर भी निशाना साधा और निकाय चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए संगठन की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जिला अध्यक्षों ने पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया और चुनाव में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को टिकट दिए।

विश्वेंद्र सिंह ने दावा किया कि चुनाव नतीजों से साफ है कि इन फैसलों को लेकर जनता में नाराजगी थी। उन्होंने डोटासरा की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दोनों जिला स्तर के नेताओं को संरक्षण दिया।

विश्वेंद्र सिंह के इन बयानों के बाद राजस्थान कांग्रेस में टिकट वितरण, संगठन के अंदरूनी कामकाज और जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग और आसपास के इलाकों में पार्टी के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इन क्षेत्रों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेतृत्व के कामकाज के कारण इस क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है।

प्रदेश नेतृत्व पर सीधा हमला करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने चुनावी हार पर डोटासरा की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिला स्तर के नेतृत्व के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं की वह आलोचना कर रहे हैं, जब तक वे अपने पदों पर बने रहेंगे, तब तक कांग्रेस के लिए इस क्षेत्र में अपने संगठन को दोबारा मजबूत करना मुश्किल होगा। उन्होंने निकाय चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश नेतृत्व से जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

विश्वेंद्र सिंह के इन बयानों से राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी और संगठन की जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है।