पेरिस, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश बार एसोसिएशन चुनावों में पक्षपातपूर्ण रवैए का हवाला देते हुए “अनियमितताओं” और “भेदभावपूर्ण बर्ताव” का आरोप प्रशासन पर लगाया है। इसे एक पैटर्न का हिस्सा बताते हुए दावा किया कि बार एसोसिएशन चुनावों में सिर्फ पॉलिटिकल आइडियोलॉजी को आधार बनाया गया और अवामी लीग के समर्थक माने जाने वाले वकीलों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।
फ्रांस में जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने आरोप लगाया कि इन वकीलों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है, और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार के तहत मुंशीगंज, मैमनसिंह, ठाकुरगांव, पंचगढ़, झलकाठी, खुलना, नरैल और सुनामगंज समेत कई जिलों में बार एसोसिएशन के चुनावों में पुलिस के दखल का हवाला दिया।
गंभीर चिंता जताते हुए, मानवाधिकार संस्था ने ऐसा माहौल सुनिश्ति करने की मांग की जिसमें सभी धर्मों के वकील अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सीधी निगरानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच के जरिए कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की गई है।
जेएमबीएफ के मुताबिक, ये घटनाएं “कुछ अलग” नहीं हैं, बल्कि “राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की एक सिस्टमैटिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसके जरिए न्यायिक समुदाय के एक हिस्से को जानबूझकर पेशेवर और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से बाहर किया जा रहा है।”
संगठन ने कहा कि “नतीजतन, स्वतंत्र प्रोफेशनल बॉडी के तौर पर बार एसोसिएशन के बुनियादी चरित्र को कमजोर किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का भरोसा कम होने का खतरा पैदा हो रहा है।”
राइट्स बॉडी ने जोर देकर कहा कि देश के मौजूदा कानूनी ढांचे और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों को देखते हुए ऐसी हरकतें पूरी तरह से मंजूर नहीं हैं।
जेएमबीएफ ने कहा, “एक बार एसोसिएशन को एक सेल्फ-गवर्निंग प्रोफेशनल बॉडी (स्वशासी व्यावसायिक निकाय) के तौर पर, तटस्थता, पारदर्शिता और समान अधिकारों के मूल्यों पर काम करना चाहिए। लेकिन हो इसके उलट रहा है। उम्मीदवारों को बिना सुनवाई, बिना किसी जांच या अपना बचाव करने का मौका दिए अयोग्य घोषित किया जा रहा है, जो नेचुरल जस्टिस और ड्यू प्रोसेस के सिद्धांतों का साफ उल्लंघन है। साथ ही, प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से दखल देना पावर का गलत इस्तेमाल है और कानून के राज की अवधारणा को बुरी तरह कमजोर करता है।”
जेएमबीएफ ने वकीलों पर दबाव डालने की खातिर “राजनीतिक रूप से संवेदनशील और अस्पष्ट शब्दावली” के इस्तेमाल पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि चुनाव अधिकारी अपनी तटस्थता खो रहे हैं और कई मामलों में बिना विरोध के चुनाव इस तरह से कराए जा रहे हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सिर्फ “मजाक” बनकर रह गई है।
संगठन ने चिंता जताई कि अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो, “कानूनी पेशे की आजादी और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता को गंभीर खतरा पैदा होगा।”
मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, बार काउंसिल और कानून के राज के लिए काम करने वाले वैश्विक संस्थानों से बांग्लादेश बार एसोसिएशन की स्थिति पर ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने की अपील की।

