तिरुवनंतपुरम, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल में बिजली की खपत में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिल रहा है, क्योंकि भीषण गर्मी और कुकिंग गैस की कमी के चलते घरों और छोटे व्यवसायों को बिजली के उपकरणों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
इसके परिणामस्वरूप मंगलवार शाम को राज्य में बिजली की मांग 6,012 मेगावाट के शिखर पर पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसने सोमवार के 5,933 मेगावाट के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया। कुल दैनिक खपत भी बढ़कर 112.52 मिलियन यूनिट के मासिक उच्च स्तर पर पहुंच गई।
इसमें से, 87.42 मिलियन यूनिट की एक बड़ी मात्रा राज्य के बाहर से प्राप्त की गई, जो बाहरी आपूर्ति पर केरल की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। इसके विपरीत, राज्य के भीतर (हाइडल पावर सहित) बिजली उत्पादन का योगदान केवल 25.09 मिलियन यूनिट रहा।
इस बीच, बिजली की खपत लगातार बढ़ने से केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) असमंजस की स्थिति में है और उसे समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या कदम उठाया जाए।
बिजली की मांग में इस अचानक उछाल की वजह सिर्फ भीषण गर्मी ही नहीं, बल्कि खाना पकाने के तरीकों में आया बदलाव भी है।
केरल में इंडक्शन कुकर का काफी इस्तेमाल होता है, और एलपीजी सिलेंडरों की लगातार कमी के चलते कई घरों ने अब इलेक्ट्रिक स्टोव का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
यह चलन सड़कों के किनारे बने ढाबों और चाय की दुकानों पर भी साफ नजर आ रहा है, जो पूरे राज्य में आम तौर पर दिखते हैं, और इनमें से कई जगहों पर कुकिंग गैस का इस्तेमाल कुछ समय के लिए बंद करके, उसकी जगह बिजली से चलने वाले विकल्पों को अपना लिया गया है।
एक तरफ जहां बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ गर्मी कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
बुधवार को राज्य के बड़े हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में रहे, और 12 जिलों के लिए ‘हाई टेम्परेचर अलर्ट’ (अत्यधिक तापमान की चेतावनी) जारी किया गया।
पलक्कड़ में इस मौसम में दूसरी बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

