नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) देश के कोयला उत्पादन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है और वित्त वर्ष 2025-26 में इसने भारत के कुल कोयला उत्पादन में लगभग 17 प्रतिशत योगदान दिया है। वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के कुल उत्पादन में एसईसीएल की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत रही।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के कोयला क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। पारदर्शिता बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने, तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, कारोबारी सुगमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत एवं संरचनात्मक सुधार लागू किए गए। इन कदमों के कारण खनन योजनाओं का आधुनिकीकरण हुआ, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई और कोयले की ढुलाई के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिली।
इन सुधारों का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दिया है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन का महत्वपूर्ण आंकड़ा पार किया, और और देश का कुल कोयला उत्पादन बढ़कर 1.04 अरब टन (अनंतिम) तक पहुंच गया।
वर्तमान में भारत की लगभग 73 प्रतिशत बिजली उत्पादन जरूरतें कोयले पर आधारित हैं, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में इस क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कोयला क्षेत्रों में परिचालन करने वाली सीआईएल की मिनी रत्न कंपनी एसईसीएल इस उपलब्धि की प्रमुख भागीदार रही है। स्थापना वर्ष 1985-86 में जहां कंपनी का उत्पादन केवल 34.2 मिलियन टन था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 176.28 मिलियन टन तक पहुंच गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एसईसीएल का कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के 124.26 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 176.28 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में कंपनी की कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) 122.03 मिलियन टन से बढ़कर 178.63 मिलियन टन पहुंच गई, जो 46 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है। कंपनी वर्तमान में 13 राज्यों को कोयले की आपूर्ति कर रही है।
एसईसीएल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उत्पादकता में आया सुधार भी शामिल है। खनन दक्षता का प्रमुख पैमाना माने जाने वाले आउटपुट प्रति मैन शिफ्ट (ओएमएस) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में यह 7.23 टन था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 16.47 टन हो गया। यानी एक दशक में उत्पादकता दोगुनी से अधिक हो गई है।
कंपनी के संचालन का केंद्र कोरबा स्थित तीन मेगा खदानें गेवरा, कुसमुंडा और दिपका हैं। संयुक्त रूप से इन खदानों की क्षमता 185 मिलियन टन है। यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े कोयला खनन और बिजली उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है और इसे अक्सर “भारत का पावरहाउस” कहा जाता है।
कोयले के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए एसईसीएल बड़े रेल परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे कॉरिडोर तथा छत्तीसगढ़ ईस्ट-वेस्ट रेलवे कॉरिडोर विकसित कर रही है। इन परियोजनाओं में लगभग 13,685 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है और इनके तहत करीब 342.6 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जाएगी।
