मनीला, 23 जुलाई (आईएएनएस)। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को मनीला में आयोजित आसियान मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। इस बैठक में यूक्रेन संघर्ष सुलझाने को लेकर मास्को तत्पर दिखा और ‘एंकोरेज फॉर्मूले’ को लेकर प्रतिबद्धता जताई।
रूसी मीडिया के अनुसार, लावरोव ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए मास्को तैयार है और एंकोरेज में हुई सहमति को लेकर प्रतिबद्धता बनाए जताई। उन्होंने रूबियो को युद्ध क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी और यूक्रेन को आगे हथियारों की आपूर्ति नहीं करने के महत्व पर जोर दिया।
रूस के विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया गया कि दोनों नेताओं ने रूस और अमेरिका के राजनयिक मिशनों के कामकाज को सामान्य बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा की। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति सहित कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि विदेश मंत्रालयों के बीच संपर्क जारी रखा जाएगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मंच भी शामिल हैं। बैठक में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
इससे पहले 26 जून में लावरोव ने यूक्रेन संकट के समाधान में अमेरिका की भूमिका को लेकर स्पष्टता की मांग की थी। यह बयान मार्को रूबियो की उन टिप्पणियों के बाद आया था, जिनमें उन्होंने एंकोरेज शिखर बैठक के परिणामों पर चर्चा की थी।
रूबियो ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एंकोरेज बैठक में यूक्रेन मुद्दे पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।
राष्ट्रपति पुतिन और ट्रंप अगस्त 2025 में एंकोरेज में मिले थे और दोनों ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर चर्चा की थी।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए लावरोव ने कहा था, “एंकोरेज में हुई बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, मार्को रूबियो और मैं खुद मौजूद था, पुतिन ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से एक-एक कर अमेरिकी प्रस्तावों की पुष्टि की थी। पुतिन ने हर बिंदु के बाद विटकॉफ से पूछा था कि क्या उन्होंने मॉस्को यात्रा के दौरान दिए गए अमेरिकी विचारों को सही तरीके से प्रस्तुत किया है।” लावरोव के मुताबिक, विटकॉफ ने हर बार हां कहकर इसकी पुष्टि की थी।
रूसी विदेश मंत्री ने आगे कहा, “जब रूबियो यह कहते हैं कि अलास्का (एंकोरेज) में केवल प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह सवाल उठता है कि समझौते का अर्थ क्या है। अगर एक पक्ष समाधान के लिए प्रस्ताव रखता है और दूसरा पक्ष उन प्रस्तावों पर सहमति जताता है, तो इसे केवल प्रस्ताव कहना सही नहीं लगता।”
लावरोव ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में एक कार्यक्रम के दौरान रूबियो ने अमेरिका की ओर से संघर्ष को खत्म करने और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप पिछले डेढ़ साल से इस युद्ध को समाप्त करने और दोनों पक्षों को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।
लावरोव ने कहा कि इन बयानों से यह पुष्टि होती है कि एंकोरेज में अमेरिकी प्रस्ताव रखे गए थे और रूस ने उन्हें स्वीकार किया था। हालांकि, उन्होंने रूबियो के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका यूक्रेन का समर्थन करने के कारण निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता।
रूसी विदेश मंत्री ने कहा, ” अब जब वॉशिंगटन दोनों पक्षों को साथ लाने और रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा जाहिर कर रहा है, तो यह मध्यस्थता की दिशा में कदम जैसा प्रतीत होता है। इस पूरे मामले पर अभी और स्पष्टता की आवश्यकता है, लेकिन तथ्य यह है कि एंकोरेज में अमेरिकी प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी और रूस ने उन्हें स्वीकार किया था।”

