Tuesday, July 14, 2026
SGSU Advertisement
Home Student & Youth सिंगापुर कोर्ट ने बायजू रवींद्रन की अपील खारिज नहीं की, सिर्फ स्टे...

सिंगापुर कोर्ट ने बायजू रवींद्रन की अपील खारिज नहीं की, सिर्फ स्टे याचिका ठुकराई: कंपनी

0
3

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। एडटेक कंपनी बायजूज ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि संस्थापक बायजू रवींद्रन की सिंगापुर अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज होने संबंधी मीडिया रिपोर्टें भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। कंपनी ने कहा कि सिविल अवमानना के फैसले के खिलाफ रवींद्रन की मुख्य अपील अभी भी सिंगापुर कोर्ट ऑफ अपील में लंबित है।

कंपनी के अनुसार, 9 जुलाई को सिंगापुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई केवल उस आवेदन पर केंद्रित थी, जिसमें 25 मई 2026 को जारी सिविल अवमानना आदेश पर अस्थायी रोक (स्टे) लगाने की मांग की गई थी। यह रोक तब तक मांगी गई थी, जब तक कोर्ट ऑफ अपील में रवींद्रन की मुख्य अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।

कंपनी ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल स्टे आवेदन खारिज किया है। अदालत ने न तो मुख्य अपील पर सुनवाई की और न ही उसे खारिज किया।

कंपनी ने बयान में कहा, “9 जुलाई की सुनवाई का संबंध 25 मई 2026 के सिविल अवमानना आदेश को पलटने वाली अपील से नहीं था। यह केवल हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश पर अस्थायी रोक लगाने के अनुरोध तक सीमित थी, जब तक कोर्ट ऑफ अपील मुख्य अपील पर फैसला नहीं देता।”

कंपनी ने कहा कि यह कहना गलत है कि बायजू रवींद्रन अदालत के आदेश को पलटने की कोशिश में हार गए हैं। सिविल अवमानना के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी मुख्य अपील अब भी कोर्ट ऑफ अपील में लंबित है।

बायजूज ने कहा कि रवींद्रन के पास अभी भी कोर्ट ऑफ अपील से उचित अंतरिम राहत मांगने का विकल्प उपलब्ध है।

कंपनी का कहना है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों ने स्टे आवेदन और मुख्य अपील को एक ही प्रक्रिया मान लिया, जबकि कानूनी रूप से दोनों पूरी तरह अलग-अलग कार्यवाहियां हैं।

कंपनी ने उन रिपोर्टों को भी गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि नए आदेश के कारण अब बायजू रवींद्रन सिंगापुर नहीं लौट सकते। कंपनी का कहना है कि इस कानूनी स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

बायजू रवींद्रन और कंपनी के संस्थापकों के वरिष्ठ मुकदमा सलाहकार जे. माइकल मैकनट ने कहा कि इस मामले में कोई नया महत्वपूर्ण घटनाक्रम नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, “9 जुलाई को सिंगापुर हाईकोर्ट ने केवल 25 मई 2026 के सिविल अवमानना आदेश पर रोक लगाने की याचिका खारिज की है। यह फैसला मामले के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि केवल समय से जुड़ा है।”

उन्होंने बताया कि रवींद्रन फिलहाल सिंगापुर में नहीं हैं और यह भी निश्चित नहीं है कि वे वहां कब या जाएंगे भी या नहीं। इसलिए अदालत ने माना कि फिलहाल इस मुद्दे पर फैसला देने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है। यदि भविष्य में वे सिंगापुर जाने का निर्णय लेते हैं, तो उस समय अदालत से राहत मांगी जा सकती है।

मैकनट ने स्पष्ट किया कि यह मामला चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज उपलब्ध कराने से जुड़े विवाद के कारण उत्पन्न हुई सिविल अवमानना का है।

उन्होंने कहा कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं है, न ही अदालत ने बायजू रवींद्रन के खिलाफ धोखाधड़ी, बेईमानी, धन के दुरुपयोग या किसी व्यक्तिगत गलत कार्य का कोई निष्कर्ष दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का प्रभाव सिंगापुर के बाहर किसी अन्य देश में नहीं पड़ता।